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कब्रिस्तान में जगह नहीं मिलती तो दरवाजे पर दफनाया जाता शव

कब्रिस्तान में जगह नहीं मिलती तो दरवाजे पर दफनाया जाता शव

देवबंदी और बरेलवी मसलक के झंझट में इमारते शरिया से सूचना आने के बाद तबलीगी जमात से जुड़े शहर के दर्जनों लोग भी सिरसिया मानिकपुर गांव पहुंच गए। गांव लोगों को मनाने के लिए प्रशासन और शांति समिति के लोगों ने बरेलवियों के साथ बैठक की। तबलीगी जमात से जुड़े मो. हसीब, अब्दुस सलाम, अब्दुल करीम, मो. फरीद, मो. कलाम, मो. खलील समेत कई लोगों ने मो. युसुफ के परिजनों के साथ बैठक की।

तबलीगी जमात के लोगों ने फैसला लिया कि यदि गांव के कब्रिस्तान में शव को दफनाने से रोका गया तो दरवाजे के सामने की खाली जमीन में शव दफनाया जायेगा। 

मृतक के पुत्र से मसलक बदलने को कहा 
मरहूम मो. युसुफ के पुत्र मो. हनीफ ने बताया कि मुफ्ती मोतीउर रहमान का फतवा आने के बाद बुधवार की सुबह मौलाना रुस्तम अली और मौलाना जैनुल आबेदीन कई युवाओं के साथ मेरे दरवाजे पर पहुंच गए। मारने पीटने की धमकी देने लगे। गांव के लोगों ने शर्त रखी की अपना मसलक बदल लो तभी गांव में रहने दिया जायेगा और शव को भी दफनाने दिया जायेगा। यह भी कहा गया कि देवबंदी मसलक के मदरसा जामे उलूम और मदरसा रसीदिया में पढ़ रहे अपने बेटों का नाम कटवाकर बरेलवी मदरसे में दाखिला करवाओ। मो. हनीफ ने कहा अपना मसलक बदलने के बजाय मामले को इमारते शरिया और इदारे शरिया पहुंचाया।

कार्रवाई के लिए एसएसपी को दिया आवेदन
मरहूम मो. युसुफ के पुत्र मो. हनीफ ने एसएसपी को आवेदन देकर मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की गुहार लगायी। एसएसपी ने माइक से घोषणा की कि ग्रामीण पीछे हट जाएं अन्यथा बाध्य होकर सख्ती बरतना होगा। शव दफनाने से रोकने व प्रताडित करने के लिए मौलाना जैनुल आबेदीन, मौलाना रुस्तम समेत आठ नामजद और दर्जनों अज्ञात के विरुद्ध मो. हनीफ ने शिकायत की। देर शाम तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी थी।

दूसरा फतवा के लिए डीएसपी संग ग्रामीण गए मुफ्ती के पास  
गांव में विवाद बढ़ जाने के बाद गांव में पहुंचे डीएसपी पूर्वी मुत्तफिक अहमद, जदयू नेता मो. जमाल, जदयू महानगर अध्यक्ष प्रो. शब्बीर अहमद पप्पू, इरफान दिलकश, मो. गुड्डा, समेत कई लोगों ने इदारे शरिया से निबंधित दारुल इफ्ता के काजी-ए-शरियत मुफ्ती शमीमुल कादरी को पूरे विवाद की जानकारी दी। काजी-ए-शरियत ने कहा देवबंदी होने के नाते गांव के लोग बेशक मो. युसुफ के परिजनों के साथ राह रस्म नहीं रखें लेकिन उसके शव को कब्रिस्तान में दफनाने से रोका नहीं जा सकता। इसके बाद गांव के मस्जिद के इमाम और प्रबुद्ध लोगों को डीएसपी पूर्वी मुत्तफिक अहमद और मो. जमाल फिर से फतवा लेने के लिए मुफ्ती मोतीउर रहमान के पास मड़वन मदरसा में ग्रामीणों को ले गए। तब विवाद खत्म करने के लिए मुफ्ती ने लिखित दिया कि कब्रिस्तान में मो. युसुफ को दफन किया जा सकता है। लेकिन, गांव वाले पहले फतवा को सही मान कब्रिस्तान में शव नहीं दफनाने देने पर अड़ गए।

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  • Web Title:Do not place the bodies buried in the cemetery at the door