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जनता जनार्दन की पूजा की आई बारी

जनता जनार्दन की पूजा की आई बारी

राज्य में विधानसभा चुनाव भले ही तीन-साढ़े तीन माह बाद होने वाले हों, लेकिन राज्यभर में चुनाव का रंग चढ़ चुका है। सभी बड़े दलों के नेता सीधे जनता-जनार्दन की पूजा में उतर गए हैं। बात-बात में जनता की दुहाई और जनहित के नाम पर समझौते-गठबंधन सामने आ रहे हैं। पक्ष-विपक्ष से कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं तो आम बात हो गई है।

दरअसल ज्यों-ज्यों चुनाव नजदीक आ रहे हैं, गेंद अब जनता के पाले में सरकती जा रही है। पांच साल बाद जनता फिर ‘ड्राइविंग सीट’ पर है। मतदाताओं के चंद प्रतिशत का गणित भी बड़ा उलट-फेर कर देगा। यह देख भाजपा गठबंधन और जदयू गठबंधन के सारे नेता सक्रिय हो गए हैं। जनता जनार्दन के साथ ही कार्यकर्ता भगवान का भी मान-मनौव्वल का दौर चालू है। चुनावी वर्ष की शुरुआत होते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिलावार कार्यकर्ताओं का सम्मेलन कर चुके हैं। अभी जदयू के सभी प्रकोष्ठों के नेताओं-कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। नीतीश कुमार और जदयू के अन्य वरीय नेताओं के साथ ही टीम प्रशांत उन्हें चुस्त-दुरुस्त कर रहे हैं। नीतीश कुमार छह जुलाई से पुन: राज्य का दौरा शुरू करने वाले हैं।
 
अन्य दलों के राजनीतिक सम्मेलन जिला व प्रमंडल स्तर पर होने वाले हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद भी गठबंधन के बाद जिलों का दौरा शुरू करने वाले हैं। भाजपा में विधानसभावार कार्यकर्ताओं का सम्मेलन चल रहा है। उसके सारे शीर्ष नेता, केन्द्रीय मंत्री इस महासम्पर्क सम्मेलनों में दनादन क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। राजग व जनता परिवार गठबंधन अपने-अपने कार्यकर्ताओं को मोटिवेट करने में जुटा है। जनता को रिझाने, समझाने, उपलब्धियां बताने के गुर कार्यकर्ताओं को बताए जा रहे हैं।
 
यही हाल ‘हम’ नेताओं का है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी पिछले डेढ़ माह में उत्तर व मध्य बिहार के दो दर्जन से अधिक जिलों का दौरा कर चुके हैं। बकौल मांझी उन्हें जनता के बीच अपनी लोकप्रियता आंकनी है, इसलिए वे सघन दौरा कर रहे हैं।

बहरहाल हर दल अब क्षेत्र में खुद को केन्द्रित करने लगा है। कितनी भीड़ जुटी, कितना जोश दिखा, इसी आधार पर सीटें तय की जाएंगी और टिकटों का बंटवारा शुरू होगा। सभी दलों के टिकटार्थी भी जनता को सिर-माथे पर बिठाए घूम रहे हैं। यानी जिसका जनाधार जितना ज्यादा, उतना उसका टिकट पक्का। भावी प्रत्याशियों के लिए भी अभी अपना-अपना समर्थन शीर्ष नेताओं के सामने दिखाने का असली मौका है। यही प्रदर्शन उनके टिकट आधार को प्रबल करेंगे। अब दोनों गठबंधन की ओर से सभी सहयोगी दलों की संयुक्त सभाएं भी होंगी ताकि जनता में यह संदेश दिया जा सके वे एक हैं। लालू प्रसाद ने सोमवार को कहा भी कि वे इस माह के आखिर में राजद-जदयू की ज्वाइंट सभा करेंगे।

कार्यकर्ता लोगों से नेताजी को दिला रहे आशीष 
भागलपुर (मृत्युंजय)।
गर्मी और हल्की मानसून के बीच आए चुनावी मौसम अपना चटख रंग दिखाने लगा है। नेताओं के दौरे, वादों की धार और आरोपों की मार सब एक साथ चल पड़े हैं। चुनाव में के वक्त आने वाले पंचसाला नेताजी को घर-घर में पहुंचाने और लोगों का आशीष दिलाने का काम कार्यकर्ताओं के कंधे पर है। चुनावी समर में सभी दलों के नेता अपने कार्यकर्ताओं को श्रेष्ठ धनुर्धर से कम ओहदा नहीं दे रहे।

इन सारे पहलुओं के बीच एक बात यह भी है कि कार्यकर्ता भले ही चुनाव में सबकुछ हो लेकिन चुनाव के बाद नेताओं का कुछ नहीं रहता। चाहे वह भाजपा का हो या कांग्रेस का या जदयू-राजद का। चुनाव की आहट से पहले ही जिले में सारे दलों ने नए कार्यकर्ता बनाने और पुरानों का मुंह पोछने का सिलसिला शुरू कर दिया। लोजपा, भाजपा ने बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की कमेटियां बनाईं। कांग्रेस ने भी अपनी एक समीक्षा बैठक में पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की बात उठाई। जिले में छोटी कद वाली पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने भी कार्यकर्ताओं को सहेजने के लिए कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद तारिक अनवर और प्रदेश के कई बड़े नेता मौजूद थे।  उधर, लोजपा के युवा सांसद चिराग पासवान भी जनवरीसे ही कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं।

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  • Web Title:Canaille turn came to worship