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बिहार पुलिस ने 5 साल पहले मरे इंसान पर लगाई शांति भंग की धारा

बिहार पुलिस ने 5 साल पहले मरे इंसान पर लगाई शांति भंग की धारा

पटना के बिक्रम थाने एएसआई मूंगालाल सिंह ने धारा 107 के केस में एक मृतक को भी आरोपित बनाकर नाम शामिल कर दिया। एएसआई के अनुरोध पर एसडीओ कोर्ट पालीगंज द्वारा समाज में शांति भंग करने के आरोप में मृत व्यक्ति लालबिहारी महतो के खिलाफ नोटिस जारी की गई और निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। घर पर नोटिस पहुंचने पर मृतक के भाई रवींद्र कुमार सोच में पड़ गए कि पांच साल पहले मरे व्यक्ति को कोर्ट में कैसे पेश करें।

उसके बाद रवींद्र ने राज्य मानवाधिकार आयोग व एसएसपी से लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई। उसने आरोप लगाया कि कृषि भूमि पर कब्जा करने के लिए दीवार तोड़ दी गई थी। उसने बिक्रम पुलिस से सहायता करने की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने उल्टे उनके मृतक भाई का नाम केस में शामिल कर दिया। आयोग के सदस्य नीलमणि ने पटना के एसएसपी से रिपोर्ट मांगी। एसएसपी ने रिपोर्ट दी है कि भूलवश मृतक का नाम केस में शामिल हो गया। आयोग ने पूरे मामले की सुनवाई करने के बाद फैसला दिया कि मृतक के परिजनों को 20 हजार रुपए मुआवजा दिया जाए। साथ ही दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

जानकारी के मुताबिक बिक्रम निवासी रवींद्र महतो का अपने चाचा सुदर्शन महतो से जमीन का विवाद चल रहा था। बिक्रम थानेदार को दोनों ने लिखित आवेदन देकर कार्रवाई करने को दिया। थानाध्यक्ष ने एएसआई मूंगालाल सिंह को जांच करने को कहा।

जांचकर्ता ने पीडित रवींद्र से पैसे की मांग की। पैसा नहीं देने पर केस में फंसाने की धमकी दी। उसके बाद पीडित ने एसएसपी से जांचकर्ता की शिकायत कर जांच करने को कहा। अपने अधिकारी से डांट खाने के बाद एएसआई ने रवींद्र समेत उसके मृत भाई लालबिहारी महतो से शांति भंग होने के मद्देनजर धारा107 के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध एसडीओ पालीगंज से किया।

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  • Web Title:Bihar Police: Five years ago, put on the dead man to break the peace clause