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बिहार: कई नेता पुत्रों को नहीं मिली पिता की हैसियत

बिहार: कई नेता पुत्रों को नहीं मिली पिता की हैसियत

बिहार में राजनीतिक रणक्षेत्र का ताजा विवाद है राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की विरासत। राजद सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बीते दिनों दावा किया कि लालू प्रसाद की विरासत के असली हकदार वे ही हैं। पप्पू यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। राजनीति में वंशवाद को बढ़ावा देने के आरोप कांग्रेस पर लगाए जाते रहे। देश में जब तक कांग्रेस सत्ता पर काबिज रही, उसकी आलोचना के केन्द्र में यह भी एक प्रमुख मुद्दा रहा। लेकिन कांग्रेस के कमजोर पड़ने के बाद उभरने वाले राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल भी इस रोग से अपने को दूर नहीं रख पाए।
एक आम मान्यता रही है कि डांक्टर का बेटा डांक्टर और मास्टर का बेटा मास्टर। आजादी के बाद राजनीति में भी इस मान्यता को स्थापित करने का पूरा प्रयास हुआ कि -राजनेता का बेटा भी राजनेता। इसके पक्ष में तर्क दिया गया कि हमारा बेटा नेता क्यों नहीं बनेगा नेता, आखिर उसने जब से होश संभाला अपने इर्द-गिर्द राजनीतिक माहौल ही तो देखे हैं। हालांकि अपवाद को छोड़ दें तो ज्यादातर मामलों में राजनेताओं के बेटे को पिता वाली हैसियत या ऊंचाई नहीं मिल पाती है। हां, सत्ता के गलियारे मं जगह तो मिल ही जाती है। बिहार में भी ऐसे कई नेता पुत्र रहे हैं जिन्हें बतौर राजनेता पिता की हैसियत नहीं मिल पाई। हालांकि कई ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी कामयाबी का परचम लहराया।

बिहार में पिता-पुत्रों की अनगितन जोडियां राजनीति में सक्रिय रहीं। कुछेक तो साथ में भी सक्रिय रहे जबकि कुछेक समयांतर में। बिहार के पहले मुख्यमंत्री रहे श्रीकृष्ण सिंहोके दो पुत्रों में स्वराज सिंह मंत्री जबकि शिवशंकर सिंह विधायक बने। चन्द्रशेखर सिंह की पत्नी मनोरमा सिंह सांसद बनीं पर पुत्र राजनीति में सफल नहीं हो सके।

कई बार मंत्री रहे राजेंद्र सिंह के पुत्र समीर सिंह व बुद्धदेव सिंह के बेटे कुणाल को जीत के दीदार नहीं हुए। सरायगंज से कई बार विधायक और लम्बे समय तक मंत्री रहे रामविलास मिश्रा के पुत्र सज्जन मिश्रा मुखिया का चुनाव जीत पाये। शेरे बिहार रामलखन सिंह यादव के बेटे प्रकाश चन्द्र और पौत्र जयवर्धन भी शेरे बिहार के कद को छू तक नहीं पाए।

कर्पूरी के बेटे भी पिता से पीछे ही रहे
कर्पूरी ठाकुर बिहार के जननायक थे। उनके बेटे सांसद रामनाथ ठाकुर हों या ललित नारायण मिश्र के बेटे विजय कुमार मिश्र अपने-अपने पिता की खींची लकीर से पीछे ही रहे। पूर्व सीएम व सांसद रहे स्व. रामसुंदर दास के बेटे संजय दास को भी विधायकी ही मिल सकी। विद्याकर कवि के बेटे विभूति कवि, बालेश्वर राम के बेटे अशोक कुमार, उपेन्द्र प्रसाद वर्मा के पुत्र बागी कुमार वर्मा, मंजय लाल के पुत्र अजय अलमस्त, भगवत झा आजाद के बेटे सांसद कीर्ति झा आजाद और जगदेव प्रसाद के पुत्र नागमणि ही क्यों न हों, ये अपनी पारी से अधिक पिता की साख से जाने गए।

जो रहे कामयाब
बाबू जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार न सिर्फ सांसद बनीं बल्कि देश की पहली महिला स्पीकर बनकर उन्होंने बड़ी लकीर खींची। बाबूजी का नाम भी आगे बढ़ाया। अनुग्रह नारायण सिंह के पुत्र सत्येन्द्र नारायण सिंह ने सीएम और सत्येन्द्र बाबू के पुत्र निखिल कुमार ने पहले सांसद बाद में राज्यपाल बन कर अपनी पहचान बनाई। डिप्टी स्पीकर रहे मो. शकूर के पुत्र डॉं. शकील अहमद ने केन्द्र में कई बार मंत्री बनकर गौरव पाया। ठाकुर प्रसाद के पुत्र रविशंकर प्रसाद ने भी केन्द्र में मंत्री बन बड़ी कामयाबी पायी। भाजपा में वह एक राष्ट्रीय चेहरा बन चुके हैं। श्री कृष्ण सिंह के पुत्र नरेन्द्र सिंह ने मंत्री बनकर तो रामानंद तिवारी के पुत्र शिवानंद तिवारी ने भी राज्य में मंत्री और सांसद बनकर प्रतिष्ठा पायी।

इनकी हो चुकी है इंट्री
वर्तमान पीढ़ी में सक्रिय कई ऐसे राजनेता हैं जिनके पुत्र की अच्छी इंट्री हो चुकी है। कुछ ने सफलता पाई है कुछ जूझ रहे हैं। कुछ की अभी अच्छी लांचिंग होनी है। केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान राजनीति में कदम रखने के साथ सफलता की सीढियां नापने लगे हैं। वह न केवल लोजपा संसदीय दल के अध्यक्ष हैं बल्कि जमुई से सांसद भी हैं।पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्रा और पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी के पुत्र सम्राट चौधरी मंत्री रहे हैं। पूर्व मंत्री महावीर चौधरी के पुत्र अशोक चौधरी मंत्री भी रहे हैं और फिलहाल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह के दो बेटे सुमित और अजय सिंह विधायक हैं। विजय कुमार मिश्र के पुत्र ऋषि मिश्रा भी विधायक हैं। पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के पुत्र राहुल शर्मा भी विधायक रहे हैं। लालू प्रसाद यादव के दोनों पुत्र तेजप्रताप और तेजस्वी यादव दल में तो सक्रिय हैं पर चुनावी राजनीति में इंट्री होनी बाकी है। पुत्री मीसा भारती लोकसभा चुनाव में उतर चुकी हैं लेकिन सफल नहीं हुईं।

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  • Web Title:Bihar: Many leaders did not sons father's status