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कत्थक से जुड़ी परंपरा के अस्तित्व की तलाश में आयी हूं: शोभना

अपने कत्थक नृत्य के जरिए लाखों कला प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली ख्याति प्राप्त कत्थक नृत्यांगना व भारतीय ब्रांड एम्बेसडर डॉ. पद्यश्री शोभना नारायण मंगलवार को सीवान परिसदन में स्थानीय नृत्यागंनाओं से मिल रही थीं तो उनकी नजर कुछ ढूंढ़ रही थी। कुछ ऐसा जो उनके नृत्य में भी खास हो, जिसकी उन्हें तलाश है।

इधर कुछ ऐसा ही हाल इन नृत्यांगनाओं का भी था जो जिले की संस्कृति व भारतीय नृत्य शैली को अपने नृत्यों में समेटे अंतर्राष्ट्रीय कत्थक नृत्यांगना से न सिर्फ मिलने पहुंची थी, बल्कि उनसे कत्थक की भिन्न-भिन्न मुद्राओं को भी जानने व समझने पहुंची थी। इधर शोभना नारायण ने बताया कि महाराजगंज के गौर कत्थक गांव में कत्थक से जुड़ी परंपरा है, जिसके अस्तित्व की तलाश में वह यहां पर आई हैं।

बहरहाल देश भर के 18 गांवों समेत जिले के महाराजगंज के कत्थक गौर गांव में कत्थक घराना व शास्त्रीय संगीत के घराने की खोज में गौर कत्थक गांव पहुंची ख्याति प्राप्त नृत्यांगना डॉ. शोभना नारायण इस दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों से भी अवगत हुईं।

भेंट में दी गई सीवान में बनी मिट्टी की सुराही
पदमश्री से सम्मानित शोभना नारायण से सीवान के आईबी में मिलने के दौरान स्थानीय नृत्यांगनओं ने उन्हें भेंट में मिट्टी की बनी सुराही दी। साथ ही विधी डांस क्लासेज की निदेशक व नृत्यांगना शक्ति प्रिया ने उन्हें अंगवस्त्र व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान निदेशक ने कहा कि उनके लिए आज का दिन काफी अहम है जो उन्हें ख्याति प्राप्त कत्थक नृत्यांगना से कुछ सीखने का मौका मिला है। मौके पर जेडए इस्लामियां कॉलेज के प्रो. डॉ. अशोक प्रियम्बद भी मौजूद थे।

कत्थक घराने के अंबिका मल्लिक के परिजनों से मिली
महाराजगंज के गौर कत्थक गांव के सच्चिदानंद मिश्रा व करुणाकांत मिश्रा से शोभना नारायण ने उनके पूर्वजों की जानकारी ली। 40 वर्षीय मिश्रा बंधु ने उन्हें बताया कि उनके परदादा अंबिका मल्लिक 1917 से कत्थक व शास्त्रीय संगीत से जुड़े थे। उनकी शैली राग मल्हार से खुश होकर बेतिया के राजा ने सवा सौ बीगहा जमीन महाराजगंज प्रखंड के गौर गांव में दी।

मिश्रा बंधुओं ने बताया कि दादा के अभ्यास के दौरान बेतिया में बारिश शुरू हो गई थी। यह देख राजा आश्चर्यचकित रह गए। मिश्रा बंधुओं ने दादा के तबला के बोल गजकरन की चर्चा करते हुए उन्हें बताया कि इसे सुनकर पागल हाथी काबू में आ गया था। वहीं दादा के गाए हुए राग दरबारी को सुनकर पागल व्यक्ति भी ठीक हो जाता था।

एसडीओ से मांगा मिश्रा परिवार की परिसंपतियों का ब्योरा
कत्थक घराने के खोज के क्रम में मंगलवार की सुबह गांव पहुंची शोभना नारायण कत्थक परिवार के एक-एक सदस्य से मिली। उनका वीडियो क्लीप बनाया। परिवार के सभी सदस्यों के साथ सामूहिक फोटो भी खिंचवाई। एक-कर सभी से वे उनका परिचय भी जाना। मिश्रा बंधुओं ने उन्हें बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने से आधे से अधिक जमीन बिक चुकी है।

इस पर शोभना नारायण ने महाराजगंज के एसडीओ मनोज कुमार से मिश्रा बंधुओं की परिसंपतियों का ब्योरा मांगा। वहीं उनके घर को अंदर से बाहर तक देखा। उन्होंने गांव में सड़क, बिजली व पानी आदि की वस्तुस्थिति की जानकारी ली। इधर अंतर्राष्ट्रीय नृत्यांगना के गांव पहुंचने से एक ओर जहां गांव वालों के खुशी का ठिकाना नहीं था, वहीं दूसरी ओर उन्हें इस बात का भरोसा भी था कि अब गांव की स्थिति में सुधार होगा।

मिश्रा बंधुओं से किया गाने का अनुरोध
पदमश्री कत्थक नृत्यांगना शोभना नारायण ने मिश्रा बंधुओं से कुछ गाने का अनुरोध किया। इस पर दोनों भाई शास्त्रीय संगीत पर केंद्रित गीत गरीब की इच्छा पूरी कर दो गाकर..उन्हें सुनाया। सच्चिदानंद मिश्र के 11 वर्षीय बेटे अभय प्रकाश मिश्रा व व करुणाकांत मिश्र के 17 वर्षीय बेटे राजन कुमार मिश्रा के तबले पर संगत से खुश होकर शोभना नारायण ने उन्हें गले लगा लिया। इस मौके पर सीओ संतोष कुमार, बीडीओ मुकेश कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष कुमार, मुखिया सीमा देवी, उपासक सचितानंद सिंह, राधेश्याम मिश्रा व दिलीप कुमार सिंह आदि मौजूद थे। 

शास्त्रीय संगीत सीखने पर दिया जोर
गौर कत्थक गांव में शास्त्रीय संगीत की विरासत की खोज में पहुंची शोभना नारायण ने इस दौरान लोगों को शास्त्रीय संगीत सिखने की बात कही। उन्होंने कहा कि पहले के जमाने में शास्त्रीय संगीत के माध्यम से कई बीमारियों का इलाज भी किया जाता था। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि आज शास्त्रीय संगीत व कत्थक नृत्य की प्रासंगिकता खत्म होने के कगार पर है, जिसे बचाने की जरूरत है।

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