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बिहार: अध्यक्ष-सभापतियों की सिमटी राजनीतिक पारी

बिहार: अध्यक्ष-सभापतियों की सिमटी राजनीतिक पारी

परंपरा रही है कि सत्तारूढ़ दल के किसी अनुभवी विधायक को विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) और जानकार विधान पार्षद को विधान परिषद के सभापति (चेयरमैन) पद की जिम्मेवारी सौंपी जाती है। इन पर विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही के संचालन की जिम्मेदारी होती है। जन प्रतिनिधियों, सत्तापक्ष और विपक्ष की निगाहें भी उन पर टिकी होती हैं।

ऐसे एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ विधायक विधानसभा का अध्यक्ष व तीन दर्जन विधान पार्षद अब तक सभापति बन चुके हैं। वैसे तो दोनों पद काफी प्रतिष्ठा के होते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसा देखा गया है कि इन पदों पर काबिज होने के बाद नेताओं की राजनीतिक पारी सिमट जाती है। पद से हटने के बाद उनके राजनीतिक कैरियर पर असर पड़ा। उनका सक्रिय राजनीति से नाता खत्म हो गया और जनता एवं दलों में उनकी हैसियत एक आदर्श नेता या मार्गदर्शक की रह गई। 

पद से हटने पर नेपथ्य में चले गए कई नेता
बिहार विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष रामदयालु सिंह ने 1937 में पदभार ग्रहण किया और 1944 तक कायम रहे। उसके बाद बिंध्येश्वरी प्रसाद वर्मा लगभग 15 वर्षों तक सदन के अध्यक्ष रहे। जब डॉं. लक्ष्मी नारायण सुधांशु श्री वर्मा के बाद अध्यक्ष बने तो उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी और पूर्व के नेता नेपथ्य में चले गए। अपवाद में धनिक लाल मंडल को छोड़ दें जो केन्द्रीय मंत्री भी बने तो रामनारायण मंडल, हरिनाथ मिश्र, त्रिपुरारी प्रसाद सिंह, राधानंदन झा, शिवचंद्र झा, मो. हिदयातुल्ला खान, गुलाम सरवर, देव नारायण यादव एक-एक कर विधानसभा अध्यक्ष बनते गए, लेकिन कुर्सी से हटने के बाद सक्रिय राजनीति से उनका नाता लगभग समाप्त होता गया। राधानंदन झा तो लंबे समय तक नेपथ्य में रह कर बिहार की राजनीति का मार्गदर्शन करते रहे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह फिलहाल राजनीति में सक्रिय तो हैं पर उनके लिए बेहतर संभावना नहीं बनी। उदय नारायण चौधरी वर्ष 2005 से लगातार विधानसभा अध्यक्ष के पद पर कायम हैं। इसी क्रम में उच्च सदन के सभापति के रूप में तीन दर्जन नेता अबतक जिम्मेवारी संभाल चुके हैं लेकिन इनमें से अधिकांश नाम अब लोगों को याद भी नहीं हैं। इनमें राजीव रंजन प्रसाद, श्याम प्रसाद सिंह, नईमा खातुन हैदर, रामेश्वर प्रसाद सिंह, राय ब्रजराज कृष्ण, राधा गोविंद प्रसाद, रावणेश्वर मिश्र, कुमार गंगा नंद सिंह, थियोडोर बोदरा, देवशरण सिंह, रामप्यारी देवी, अनिल कुमार सेन, अब्दुल गफूर, डॉ. राम गोविंद सिंह, महेंद्र प्रसाद, कृष्णकांत सिंह, सुश्री राजेश्वरी सरोज दास, शामूचरण तुविद, पृथ्वी चंद किस्कू, उमेश्वर प्रसाद वर्मा के नाम प्रमुख हैं। नयी पीढ़ी इनके नामों से अपरिचित है। प्रो. अरुण कुमार लंबे समय तक सदन में रहे और सभापति भी बने लेकिन पद से हटने के साथ ही उनकी राजनीतिक गतिविधियां कमतर होती चली गईं। प्रो. जाबिर हुसैन ने लंबे समय तक पदभार संभाला, राज्यसभा सदस्य भी बने, लेकिन आज वो भी लेखन और अन्य गतिविधियों से जुड़े हैं, सक्रिय राजनीति में नहीं है।

कौन कब से कब तक रहे विधानसभा अध्यक्ष

नाम                           कार्यकाल
रामदयालु सिंह  23.07.1937 - 11.11.1944
बिंध्येश्वरी प्रसाद वर्मा 25.04.1946 -  14.03.1962
डॉ. लक्ष्मी नारायण सुधांशु 15.03.1962 - 15.03.1967
धनिकलाल मंडल 16.03.1967 - 10.03.1969
रामनारायण मंडल 11.03.1969 - 20.03.1972
हरिनाथ मिश्र  21.03.1972 - 26.06.1977
त्रिपुरारी प्रसाद सिंह 28.06.1977 -  22.06.1980
राधानंदन झा  24.06.1980 - 01.04.1985
शिवचंद्र झा  04.04.1985 - 23.01.1989
मो हिदयातुल्ला खां 27.03.1989 - 19.03.1990
गुलाम सरवर  20.-03.1990 - 09.04.1995
देवनारायण यादव 12.04.1995 - 06.03.2010
सदानंद सिंह  09.03.2000- 28.06.2005
उदयनारायण चौधरी 30.11.2005 - 29.11.2010
                                  02.12.2010 ———————-

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  • Web Title:Bihar: Chairman of Chairmen tucked political shift