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यात्री सुविधा पखवाड़े में समय पर ट्रेन न टिकट

यात्री सुविधा पखवाड़े में समय पर ट्रेन न टिकट

समय पर ट्रेन नहीं। बैठने को जगह नहीं, ट्रेन में न प्लेटफॉर्म पर। टिकट मिलता नहीं। रेलवे के काउंटर पर न ही ई-टिकट एजेंट के पास। रेलवे का यात्री सुविधा पखवाड़ा कुछ इसी अंदाज में मनाया जा रहा है। अधिकारी दौड़ लगा रहे हैं। उन्हें यात्रा भत्ता मिल रहा है। पर, यात्रियों को ...। 26 मई से शुरू यात्री सुविधा पखवाड़ा का जब ‘हिन्दुस्तान टीम’ ने मंगलवार को जायजा लिया तो ये सच सामने आए। पेश है दिग्विजय की रिपोर्ट-

समय पर ट्रेन नहीं, घंटों करना पड़ता है इंतजार
चिलचिलाती धूप से परेशान यात्री दोपहर एक बजे पूछताछ कार्यालय पर पहुंचते हैं। अंदर से बस एक ही आवाज-डाउन दिशा की कोई भी ट्रेन अबतक छपरा नहीं पहुंची है। सीतामढ़ी जाने वाली सवारी ट्रेन का भी पता नहीं। दिल्ली से दरभंगा जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस चार घंटे देरी से आयी है। न जाने कौन सी ट्रेन कब आए। कोई नहीं बता सकता। ट्रेन की जानकारी लेने कुछ यात्री स्टेशन मास्टर के कार्यालय में भी पहुंच गए। वहां भी यही जवाब।

टिकट की भी मारामारी, दो काउंटर बंद
सीतामढ़ी के नानपुर निवासी विभा देवी परेशान होकर आरपीएफ की ओर से संचालित यात्री सुविधा पखवाड़ा केन्द्र पर पहुंची। कहने लगी बुकिंग काउंटर पर दिल्ली के लिए टिकट नहीं मिल रहा। मीडिया का कैमरा देख आरपीएफ ने त्वरित कार्रवाई की। विभा के साथ एक जवान बुकिंग काउंटर तक गया। बीस मिनट तक कतार में खड़ा होने के बाद उसे दिल्ली तक की टिकट दी गयी। बुकिंग काउंटर कतार में खड़ी कमतौल की शोफियान को करीब 25 मिनट बाद टिकट मिला था। 11 में से 9 काउंटर ही खुले थे।

बैठने तक के लिए जगह नहीं
यात्रियों की भीड़ इतनी अधिक की वेटिंग हॉल फुल। प्लेटफॉर्म पर बैठने की जगह नहीं बची थी। एसी क्लास में सफर करने वाले यात्रियों का बुरा हाल था। जंक्शन पर फर्स्ट क्लास श्रेणी के यात्रियों के लिए वेटिंग हॉल तक नहीं है। यात्री अपने सामान पर ही बैठे थे। प्लेटफॉर्म पर लगे पंखे चल रहे थे, पर यात्री पसीना से तर-बतर थे। प्लेटफॉर्म ही नहीं ट्रेनों में ठूंसने की भी जगह नहीं बची थी। जेनरल क्लास की बोगी में घुसने की हिम्मत नहीं हो रही थी। आरक्षित श्रेणी के कोच में भी पैर रखने की जगह नहीं बची थी।

नहीं हैं क्षेत्रीय अधिकारी, समूह यात्रा पर संकट
मुजफ्फरपुर में पिछले एक माह से क्षेत्रीय अधिकारी तैनात नहीं हैं। सो, समूह में यात्रा करने वाले, अंतिम समय में टिकट पर नाम बदलने वाले, पार्सल में वजन अधिक होने पर यात्री परेशान हैं। समूह में यात्रा करने वाले यात्रियों को क्षेत्रीय अधिकारी की सहमति अनिवार्य होती है। मंगलवार को धर्मशाला चौक निवासी अरविंद कुमार नाम बदलवाने के लिए क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय पहुंचा था। पर, काम हो नहीं सका। अंतत: उसे कंफर्म टिकट रद करानी पड़ी। वेटिंग में टिकट लेकर सफर करना पड़ा।

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  • Web Title:At half-time train traveler or ticket