DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पटना में 102 एंबुलेंस सेवा खुद बीमार

पटना में 102 एंबुलेंस सेवा खुद बीमार

स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य के हरेक पीएचसी, सीएचसी पर मौजूद रहने वाली 102 एंबुलेंस सेवा का यह हाल है। कभी कॉल सेंटर की हड़ताल तो कभी एंबुलेंस खराब। कभी ड्राइवर और टेक्निशियन की कमी। इन सब कारणों से एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल है। लाइव टीम ने जब इस सेवा की पड़ताल तो यही सच्चाई सामने आई। पड़ताल में पता चला कि इन सब कारणों से यह सेवा पटना जिला सहित पूरे राज्य में दम तोड़ रही है। कई पीएचसी, सीएचसी की एंबुलेंस खराब होकर वर्कशॉप में खड़ी है। कहीं-कहीं एमओआईसी (मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज) की तरफ से भी लापरवाही बरती जा रही है। दो साल में पांच बार हड़ताल पर जाने के बावजूद अभी तक कॉल सेंटरकर्मियों का मानदेय बकाया है।

नई आई तो ईएमटी की कमी: पहले चरण की एंबुलेंस के खराब होने और वर्कशॉप में पड़े रहने के बाद सरकार ने 266 नई एंबुलेंस मंगाई। इसमें से भी कई बंद है। संख्या के अनुरूप ड्राइवर और ईएमटी (इमरजेंसी टेक्निशियन) नहीं होने के कारण एंबुलेंस खड़ी हैं।

दुर्घटना-डिलीवरी में मुफ्त
102 एंबुलेंस की खासियत यह है कि डिलीवरी और सड़क दुर्घटना के केस में मरीजों को मुफ्त सुविधा दी जाती थी। एंबुलेंस बंद होने का असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ा है। वहां से जननी सुरक्षा योजना या सड़क दुर्घटना के केस में मरीजों को कोई मदद नहीं मिल पा रही है। दूसरे एंबुलेंस से काम चलाया जा रहा है। पर अभी भी सैकड़ों मरीजों को मदद नहीं मिल पाती है।

एंबुलेंस में जंग
जिले की आठ एंबुलेंस सगुना मोड़ स्थित वर्कशॉप में खड़ी है। कुछ एंबुलेंस बायपास स्थित वर्कशॉप पर भी है। इसमें पंडारक, धनरुआ, बख्तियारपुर, बेलछी, घोड़सरी, मनेर, फुलवारीशरीफ, अथमलगोला पीएचसी शामिल है। नवंबर 2013 से जनवरी 2014 के बीच से ये यहां खड़ी हैं। राजधानी के दो मोटर वर्कशॉप में करीब सौ 102 एंबुलेंस खड़ी हैं। कागज पर इन गाडियों की मरम्मत हो चुकी है। लेकिन हकीकत में इन गाडियों में जंग लग चुकी है। धूल की मोटी परत जमी है। टायर खराब हो चुके हैं। अब अस्पताल तक पहुंचने के लिए इन्हें दुबारा से मरम्मत की दरकार होगी। सगुना मोड़ और बाइपास स्थित वर्कशॉप में एंबुलेंस खड़ी हैं।

मरम्मत से ज्यादा पार्किंग चार्ज
जिन वर्कशॉप में एंबुलेंस खड़ी हैं। वहां मरम्मत चार्ज से ज्यादा पार्किंग चार्ज हो गया है। सगुना मोड़ स्थित वर्कशॉप में खड़ी 25 गाडियों का पार्किंग चार्ज 11 लाख रुपए से ज्यादा हो गया है। मरम्मत खर्च 13 लाख रुपए है। कुछ दिन तक गाडियां और खड़ी रहेंगी तो मरम्मत खर्च से ज्यादा पार्किंग चार्ज देना होगा। वर्कशॉप में खड़ी गाडियों के लिए सौ रुपए प्रति एंबुलेंस का पार्किंग शुल्क का बिल आ रहा है।

भुगतान विवाद से सेवा पर असर
कभी एंबुलेंस सेवा भुगतान का विवाद तो कभी कॉल सेंटर कर्मियों के मानदेय भुगतान का विवाद। भुगतान विवाद से इस सेवा का बंटाधार हो रहा है। दरअसल, एनआरएचम के तहत बिहार में 2012 में इस सेवा की शुरुआत हुई थी। नाम रखा गया था, बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस। राजधानी में मौजूद कॉल सेंटर से पूरे राज्य से कॉल अटेंड की जाती थी। पहले चरण में 529 एंबुलेंस आई थी। कुछ महीनों में सेवा लड़खड़ा गई। सबसे पहले डॉं. जैन वीडियो ऑन व्हील्स को इसकी जिम्मेवारी दी गई थी। कुछ महीने बाद ही भुगतान का विवाद हो गया और डॉं. जैन वीडियों ने काम छोड़ दिया। भुगतान विवाद अभी भी चल रहा है। इसी कारण से विभिन्न मोटर वर्कशॉप में मरम्मत के लिए गई एंबुलेंस खड़ी हैं। वहीं, कॉल सेंटर कर्मियों की हड़ताल बार-बार हो रही है।

108 एंबुलेंस की हालत भी ठीक नहीं
102 एंबुलेंस के अलावा 108 एंबुलेंस भी शहर क्षेत्र के मरीजों के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत एडवांस सपोर्ट की कुल 50 एंबुलेंस खरीदी गई थी। मगर भुगतान के विवाद में आधे से ज्यादा बंद हैं। इसका संचालन मुंबई की संस्था जिक्पजा हेल्थ केयर लिमिटेड करती है। बिल का भुगतान नहीं होने पर इस संस्था ने राज्य स्वास्थ्य समिति को नोटिस देकर करीब 29 एंबुलेंस की सेवा बंद कर दी है। इस कारण कई जिलों में यह सेवा बंद है। पटना जिले में ग्यारह 108 एंबुलेंस हैं जो चल रही हैं। अन्य राज्यों मप्र, यूपी, छतीसगढ़ में एंबुलेंस कंपनियों को 80 प्रतिशत भुगतान प्रदेश स्तर पर ही कर दिया जाता है। 20 प्रतिशत भुगतान जिला स्वास्थ्य समिति करती है। बिहार में एंबुलेंस संबंधी भुगतान की जिम्मेवारी जिला स्वास्थ्य समितियों को सौंपी गई है। यही कारण है कि बिहार में कोई कंपनी ज्यादा दिनों तक नहीं ठहर पाती। 

पहले की सेवा का भी हाल-बदहाल
बिहार सरकार का भुगतान का तरीका गलत होने के कारण न जाने कितनी एंबुलेंस संचालित करने वाली कंपनियां आईं और कितनी लौट गईं। इसका कारण रहा निजी-सरकारी भागीदारी। 102 एंबुलेंस से पहले बिहार में 2006 में मुंबई की राज भ्रा हेल्थ केयर की मोबाइल मेडिकल गाड़ी आई थी। समय पर पैसा न मिलने के कारण 2008 में काम बंद कर दिया। सरकार के पास 70 लाख रुपए बकाया रह गया है। 2009 में बिहार में तीन कंपनियां जागरण सॉल्यूशन, स्पेक हेल्थकेयर सिस्टम व डॉं. जैन वीडियो ऑन व्हील्स आए। समय पर पैसे नहीं मिला तो स्पेक हेल्थकेयर ने चार माह बाद ही काम बीच में छोड़ दिया। डॉं. जैन वीडियो ऑन व्हील्स लिमिटेड का एमएमयू और 102 एंबुलेंस सेवा एक मई 2012 से शुरू हुई। बकाया विवाद के कारण डॉ. जैन वीडियो ऑन व्हील्स ने भी काम छोड़ दिया।

दुल्हिन बाजार में गाड़ी खराब
दुल्हिन बाजार के सरकुना, भरतपुरा के राजेश कुमार ने रविवार सुबह 7:45 बजे 102 एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। वे अपनी गर्भवती पत्नी रुनकी देवी को दुल्हिन बाजार अस्पताल ले जाना चाहते थे। मगर उन्हें 102 एंबुलेंस की सेवा नहीं दी गई। कारण ड्राइवर ने बताया कि गाड़ी कई दिनों से खराब है। बाद में राजेश को प्राइवेट एंबुलेंस की मदद लेनी पड़ी।

सिर्फ रेफरल केस में जाएंगे
सराय, नौबतपुर के अभय कुमार ने रविवार सुबह आठ बजे मरीज साबिया को अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस पर फोन किया। कॉल सेंटर को ड्राइवर ने जवाब दिया कि केवल रेफरल केस में ही एंबुलेंस जाएगी। एमओआईसी ने ऐसे ले जाने से मना किया है। इस तरह अभय को भी 102 एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिला। उन्हें मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

संपतचक की गाड़ी गैराज में
गौरीचक थाने के कंडाप गांव के अमरजीत दास गांव से बाहर थे। रविवार ग्यारह बजे अपनी गर्भवती पत्नी को संपतचक अस्पताल ले जाने के लिए उन्होंने 102 एंबुलेंस कंट्रोल रूम को फोन किया। कंट्रोल रूम ने ड्राइवर से बात की तो पता चला कि एंबुलेंस पिछले कई दिनों से खराब है। बाद में अमरजीत ने किसी साथ की मदद से पत्नी को अस्पताल पहुंचाया। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:102 ambulance service in Patna sick themselves