DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फिजां में अभी से गूंजने लगे बाढ़ व कटाव से मुक्ति के सवाल

फिजां में अभी से गूंजने लगे बाढ़ व कटाव से मुक्ति के सवाल

विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही जिले के दियारे इलाके में बाढ़ पीडितों के जख्म फिर से हरे हो चले हैं और इसके साथ ही फिजां में गूंजने लगे हैं बाढ़ व कटाव से मुक्ति के सवाल। इन सवालों से नेताजी भी खूब घिरेंगे। बाढ़ के कहर से तबाह जिले के दियारावासी के वर्षों पुराने इन सवालों का जवाब आजतक उन्हें नहीं मिल पाया है। बस वे आजतक वादों व घोषणाओं से छले ही गये हैं। आजतक इन्हें बाढ़ व कटाव से मुक्ति नहीं मिली। जिले में अस्सी के दशक से साल-दर-साल दियारे के गांवों को गंडक लीलती रही है। हजारों लोग विस्थापित हो गये। सारण व रिंग बांध इनकी शरणस्थली बने हुए हैं। यहां प्लास्टिक का तनोवा टांग व झोपडियां गिराकर ये जीवन बसर करते हैं। इनके सामने हर सुबह पीर नयी और हर शाम सवाल नया है। सालभर ये बाढ़, कटाव से मुक्ति व पुनर्वास की गुहार अधिकारियों से लेकर नेताओं से लगाते रहते हैं। पर, पीड़ा जस की तस है। सदर, कुचायकोट, बरौली, बैकुंठपुर, मांझा और सिधवलिया प्रखंडों के दियारे की लाखों की आबादी हर साल बाढ़ व कटाव की तबाही झेलती है। ऐसी बात नहीं कि बाढ़ व कटाव से बचाव को सरकार या प्रशासन की ओर से कार्य नहीं कराये जाते। पर, बाढ़ पीडितों का कहना है कि सिर्फ बाढ़ व कटाव से बचाव के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी में बहा दिये जाते हैं। इसका नतीजा है कि हर साल वे तबाह होते हैं। उनकी आंखों के सामने उनके घर व जमीन गंडक में समा जाती हैं। बाढ़ पीडित मिट्टी व बालू भरे बोरे भरने की जगह बोल्डर पिचिंग की मांग करते हैं। बांध व रिंग बांध की मजबूती के लिए इसके पक्कीकरण की मांग उठाते हैं। प्रशासन से लेकर शासन के प्रति उनमें नाराजगी रहती है। अब जबकि, चुनावी मौसम शुरू हो गया है तो घोषणाओं से छले गये दियारावासियों के जख्म बाढ़ व कटाव की पीड़ा से फिर से हरे हो गये हैं। अब उनके गांव-जवार में फिर से नेताजी पहुंचेंगे। ऐसे में वे तैयार हैं अपने सवालों के साथ।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:फिजां में अभी से गूंजने लगे बाढ़ व कटाव से मुक्ति के सवाल