DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चुनावी मौसम में सक्रिय हुए बूथ व बंदूक के सौदागर

चुनावी मौसम में सक्रिय हुए बूथ व बंदूक के सौदागर

बिहार विधानसभा के चुनावी जंग की शुरुआत हो चुकी है। लिहाजा बूथ व बंदूक के सौदागरों की सक्रियता की आशंका बनी हुई है। बेगूसराय जिला बूथ कब्जा व राजनीतिक हिंसा के लिए पहले से प्रसिद्ध रहा है। जिले में बूथ व बंदूक का रिश्ता पुराना है। चुनाव में खड़े प्रत्याशी जातीय गिरोहों व अपराधियों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। पहले यह काम मतदाताओं को डरा-धमका कर बूथ तक जाने से रोकने व कालांतर में बूथ कब्जा करने की बात तक सीमित रही। अब इसका रूप बदलकर बूथ प्रबंधन व जातीय वोटों की गोलबंदी कराने में सिमट गयी है। लोकतंत्र के चुनावी इतिहास में बूथ कब्जे की अनोखी बात बेगूसराय जिले से ही शुरू हुई। वर्ष 1957 में एक कांग्रेसी प्रत्याशी के पक्ष में पहली बार बूथ कब्जे की घटना को अंजाम दिया गया था। तब से जिले में कई गिरोह बने। नेताओं ने अपने अनुकूल उनका इस्तेमाल किया व फिर चुनावी हिंसा या बाद में राजनीतिक रंजिश में कई मौत के घाट उतारे गए। चुनाव में बैलेट की जगह बुलेट के इस्तेमाल ने राजनीति को गंदा किया तो जिनके वोट लूटे गए, या जिनके क्षेत्र के बूथ पर कब्जा किए गए तो उनमें विरोध का स्वर भी तेज हुआ। जिले में सीपीआई व सीपीएम, कांग्रेस व भाजपा से सैकड़ों राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या चुनावी व राजनीतिक रंजिश में हो चुकी है। वर्ष 1969 में बिहट के राम अनुग्रह सिंह व 1978 में सीपीआई के विधायक सीताराम मिश्र की हत्या ने जिले में राजनीतिक खुन्नस को बढ़ा दिया। हालांकि, बैलेट की जगह इवीएम के प्रयोग होने व सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता किए जाने के बाद इसमें कमी आयी। लेकिन, चुनावी मौसम में अवैध हथियारों के निर्माण का कारोबार भी बढ़ा रहता है।

अवैध हथियार का निर्माण करोड़ों में
जिले में अवैध रूप से बनाए जानेवाले हथियार राज्य के कई जिलों में भेजे जाते हैं। इन अवैध हथियार निर्माण का कारोबार करोड़ों का है। जिले में बननेवाली बगडोबिया पिस्तौल की मांग राज्य के विभिन्न क्षेत्रों व अन्य राज्यों तक में है। जिले के गंगा दियारे का बेल्ट इसके निर्माताओं के लिए सेफ जोन माना जाता है। मुंगेर से लेकर जिले के साहेबपुरकमाल, मटिहानी-शाम्हो, बरौनी-तेघड़ा व बछवाड़ा-चमथा के गंगा दियारा के ऐसे बाहुबलियों व बंदूक के अवैध कारोबारियों के लिए मुफीद जगह हैं। चुनाव में मांग के अनुसार हथियार के निर्माण में तेजी आ जाती है। हालांकि, पिछले चुनावों में मतदाताओं को धमकाने के मामले में कमी आई है, लेकिन बूथ मैनेज व बूथ विशेष पर जहां किसी जाति या धार्मिक समूहों का वर्चस्व है, उनके नेताओं को अपने पक्ष में करने के लिए प्रलोभनों के तहत हथियारों का भी ऑफर दिया जाता है। बेगूसराय के सात विस में इस बार कई जातीय क्षत्रपों व बाहुबलियों की नजर है। इसे लेकर अवैध हथियारों के कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:चुनावी मौसम में सक्रिय हुए बूथ व बंदूक के सौदागर