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सहरसा में सीएम के आने से लोगों में जगी हैं नई उम्मीदें

हर दिन के साथ एक उम्मीद की किरण निकलती है... नई यादों के सफर की एक सुबह निकलती है। सचमुच शनिवार की सुबह सहरसावासियों के लिए बेहद खास है। खास इसलिए है कि कंपकंपाती इस ठंड में सरकार के मुखिया उनके दुख-दर्द को सुनने खुद आ रहे हैं। लोगों में खुशी भी हैं। उनकी बातें सुनना चाहते हैं और अपनी बातें भी सुनाना चाहते हैं। दरअसल, सहरसा का अतीत जितना गौरवाशाली रहा है, वर्तमान उतना ही कष्टदायक। लोगों को यही मलाल सालों से साल रहा है। रोजमर्रे की जिन्दगी से थक चुके लोग अब समस्याओं से निजात चाहते हैं। आज वह मौका एकबार फिर आ गया है। सीएम के आने से लोगों को अंधेरे में आशा की नई किरण दिखाई पड़ रही है। यह सच है कि पड़ोसी जिलों के मुकाबले सहरसा जिला विकास के मामले आज भी काफी पिछड़ा हुआ है। खासकर स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में स्थिति और भी बदतर है। सहरसा सदर अस्पताल को वह दर्जा नहीं मिल पाया जिसका वह हकदार है। गंभीर बीमारियों के लिए यहां के लोग आज भी राजधानी पटना और दरभंगा पर निर्भर है। यही वजह है यहां के लोग एम्स की शाखा की मांग को लेकर मुखर हैं। सहरसा शहर की सबसे बड़ी समस्या जलनिकासी की सुविधा नहीं रहना है। ड्रैनेज सिस्टम कागज तक सिमटे रहने की वजह से बरसात के मौसम में शहर नरक बन जाता है। घरों और सड़कों पर पानी जमा रहने से रहना व निकलना दूभर हो जाता है। तटबंध के अंदर भी सिवरेज की समस्या विकराल है। कब बनेगा ओवरब्रिज : तीन शिलान्यास के बाद भी शहर के बंगाली बाजार रेलवे ढाला पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। शहर की आबादी बढ़ने, वाहनों की संख्या में इजाफा और बीचोंबीच गुजरती ट्रेन के कारण पांच जगहों पर फ्लाई ओवरब्रिज की जरूरत बन आई है। एक भी ओवरब्रिज नहीं रहने के कारण जाम से शहर कराहता रहता है।उच्च शिक्षण संस्थान के अभाव में होता पलायन : एक तरफ उद्योग-धंधे नहीं खुलने से रोजगार के लिए मजदूरों का पलायन होता है। दूसरी तरफ सरकारी मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट सहित अन्य कोर्स की पढ़ाई यहां नहीं होने से प्रतिभा पलायन कर रही है। एकमात्र महिला कॉलेज में पीजी के कई विषयों की पढ़ाई की सुविधा नहीं है।बाइपास सड़क बनने से होगी सुविधा : वनगांब- बरियाही वायपास सड़क निर्माण बनने से आवागमन का मार्ग जहां सुलभ होगा वही निर्मित सड़क किनारे पड़ने वाली जमीन का मूल्य भी बढ़ेगी। वायपास सड़क योजना वाली जमीन मे सालोभर जलजमाव रहने से कई एकड़ जमीन बेकार बनी है। कुछ किसान व ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से उपेक्षित जमीन का भाव बढ़ेगा।

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