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24 जनवरी, 2020|1:26|IST

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आज भी उपेक्षित है राष्ट्रकवि दिनकर की पैतृक गांव सिमरिया

आज भी उपेक्षित है राष्ट्रकवि दिनकर की पैतृक गांव सिमरिया

दो बार आदर्श ग्राम तथा एक बार निर्मल पंचायत का सम्मान पा चुके आदर्श ग्राम सिमरिया की तस्वीर आज तक नहीं बदल पाई है। सांसद की ओर से सिमरिया को आदर्श ग्राम बनाने की घोषणा के अब ढ़ाई साल होने को है लेकिन अभी तक सिमरिया को विकसित बनाने की पहल नहीं हुई है।

आज भी सिमरिया गांव के लोग सड़क, स्वच्छ पेयजल, अस्पताल में समुचित व्यवस्था, एम्बुलेंस जैसी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। सिमरिया के लोगों का कहना है कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सांसद डॉ.भोला सिंह ने दिनकर के पैतृक गांव सिमरिया को गोद लेने की घोषणा की थी।

दो साल बाद भी यहां विकास का कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है। सिमरिया का विकास अब तक घोषणाओं, भाषण व मीटिंग तक ही सिमटा है। मल्हीपुर चौक स्थित नेशनल हाईवे से सिमरिया गांव जाने वाली सड़क वर्षों से जर्जर है। अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्र में मूलभूत संसाधन, सुविधा व एम्बुलेंस नहीं है। किसानों के लिए मौजूद एक नलकूप को पिछले 20 वर्षों से जंग खा रहा है। स्वच्छ पेयजल के लिए लगाए गए संयंत्र से गांव के कुछ हिस्से में ही पानी पहुंच रहा है। दिनकर इंटर विद्यालय में शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होने से पढ़ाई नहीं हो रही है जबकि बच्चों का नामांकन जारी है। मध्य विद्यालय में भी शिक्षकों की कमी है।

दिनकर की जन्मस्थली खंडहर बनने के कगार पर : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली की स्मृति खंडहर में तब्दील होने के कगार पर है। दिनकर जहां बैठ कर कविता लिखते थे वह जगह भी पूरी तरह से उपेक्षित है।

सांसद आदर्श ग्राम में चयन के बाद हो रहा नुकसान : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पैतृक गांव सिमरिया को सांसद आदर्श ग्राम के तहत सांसद द्वारा गोद लेने के बाद पंचायत में विकास के बदले नुकसान ही हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सिमरिया को सांसद ग्राम योजना के तहत चुने जाने के बाद अधिकारियों के द्वारा योजनाओं से यह कह कर बंचित कर दिया जाता है कि आप सांसद आदर्श ग्राम से हैं आपके लिए अलग से फंड आएगा।

सिमरिया के बच्चों की जुबान पर है दिनकर की कविताएं : आदर्श ग्राम सिमरिया में विकास के कार्य भले ही नहीं हुआ है लेकिन गांव के युवाओं के प्रयास से साहित्यिक व सांस्कृतिक विकास जरूर हुआ है। ग्रामीण युवाओं के प्रयास की बदौलत आज दिनकर की कविताएं सिमरिया के बच्चों की जुबान पर हैं। दिनकर की रचना कुरूक्षेत्र हो या रश्मिरथी, बच्चे फर्राटे के साथ सुनाते हैं।

सिमरिया के लोगों की कौन कहे, यहां की दीवारों पर भी दिनकर की कविताएं लिखी हुई हैं। दिनकर की रचना लोगों की जुबान पर हमेशा बनी रहे, इसके लिए दिनकर स्मृति विकास समिति व दिनकर पुस्तकालय के सदस्यों ने गांव के घरों की दीवारों पर दिनकर की कविताओं को अंकित कराया है। सुदूर से यहां आने वाले लोग दीवार पर अंकित कविताओं को रूक कर गौर से पढ़ते हैं।

सिमरिया समेत आसपास के गांवो में लोगों को राष्ट्रकवि दिनकर व उनकी रचनाओं से लोगों को अवगत कराने के लिए समिति दिनकर जयंती व पुण्यतिथि पर आसपास के विद्यालयों के बच्चों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से जोड़ रही है। समिति के सदस्य डेढ़ दशक से दिनकर जयंती के उपलक्ष्य पर जिले के दो प्रखंडों के विद्यालयों के बच्चों के बीच राष्ट्रकवि दिनकर सृजनात्मक प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से बच्चों में साहित्यिक प्रतिभा को निखार रहे हैं। उक्त प्रतियोगिता में सफल प्रतिभागियों को दिनकर जयंती समारोह के दूसरे दिन देश के नामचीन साहित्यिकारों द्वारा पुरस्कृत किया जाता है। दिनकर स्मृति विकास समिति के अध्यक्ष संजीत कुमार व सचिव मुचकुंद कुमार मोनू ने कहा कि घोषणाओं के बावजूद राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का पैतृक गांव सिमरिया आज तक साहित्यिक तीर्थस्थल व दिनकर शोध संस्थान नहीं बन सका है।

पूर्ण साक्षर बनने की ओर अग्रसर है सिमरिया : राष्ट्रकवि का पैतृक गांव सिमरिया पूर्ण साक्षर बनने की ओर अग्रसर है। जिला प्रशासन के निर्देश के बाद दो माह पूर्व सिमरिया में प्रखंड लोक शिक्षा समिति के द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार लगभग 13 हजार आबादी में से 397 लोग अभी निरक्षर हैं। इनमें 283 महिलाएं तथा 114 पुरूष शामिल हैं। प्रखंड लोक शिक्षा समिति के सचिव अशोक कुमार पासवान ने बताया कि वरीय प्रेरक बबलू दिव्यांशु व गीता देवी के द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार 15 से 35 वर्ष के 207 व 37 वर्ष के ऊपर 190 लोग निरक्षर हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2017 तक सिमरिया को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।

दिनकर जयंती समारोह को लेकर सिमरिया में उत्सवी माहौल : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के 108वीं जयंती समारोह को लेकर सिमरियावासियों में उत्साह है। दिनकर जयंती को लेकर मुखिया सोनी कुमारी के नेतृत्व में पूरी पंचायत में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति विकास समिति के द्वारा सिमरिया पंचायत भवन स्थित दिनकर की प्रतिमा व दिनकर पुस्तकालय के भवन का रंग-रोगन किया गया है। जगह-जगह तोरण द्वार बनाए गए हैं तथा दिनकर के पोस्टर लगाए जा रहे हैं।

साउंडप्रूफ बनेगा दिनकर स्मृति सभागार : बरौनी रिफाइनरी के सौजन्य से सिमरिया दिनकर पुस्तकालय परिसर में निर्मित दिनकर स्मृति सभागार को साउंड प्रूफ बनाने का कार्य प्रगति पर है। दिनकर पुस्तकालय के सदस्य प्रवीण प्रियदर्शी ने बताया कि दिनकर स्मृति सभागार भवन के साउंड प्रूफ न रहने से लोगों को वक्ताओं की आवाज सुनने में कठिनाई होती है। इस समस्या को पिछले वर्ष पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्र. सिंह ने रिफाइनरी के अधिकारी के समक्ष रखा था। सभागार को साउंड प्रूफ बनाने का कार्य 23 सितंबर तक पूरा हो जाने की संभावना है।

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  • Web Title:National poet dinkar native village simriya ignored today in begusarai