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पिछड़े गांव की दशा को सुधारने के लिए भले ही सांसद धर्मेन्द्र यादव और डीएम व सीडीओ ने गोद ले रखे हों और इन गांव को पिछड़े पन के दंदल से निकालने के लिए करोड़ों रूपये पानी की तरह क्यूं न बहा दिए हों। लेकिन गोद लिए गांव के हालात आज तक नहीं सुधरे हैं। गांव की जनता आज भी समस्या और बीमारियों का दंश झेल रही है। सड़क से लेकर पानी और शिक्षा के हालात बिगड़े हुए हैं चिकित्सा सेवा भी लड़खड़ाती जा रही है। वित्तीय वर्ष भी निपट गया और शासन-प्रशासन के साथ ही सांसद भी गोद लिए गांव को विकास की राह नहीं दिखा सके हैं।

जिले में पिछड़ेपन के गांव मेंं विकास कराकर जनता को बेहतर सुविधा देने के लिए पांच गांव को गोद लिया जा चुका हैं। जिनमें आवास योजना से लेकर सड़क व पानी-बिजली और शिक्षा का स्तर सुधर सके तथा बीमारियों में बचाव भी मिल सके। इसमें दहगवां ब्लाक के गांव जरीफनगर दुर्गपुर को सांसद आदर्श गांव बना रखा है और सांसद धर्मेन्द्र यादव ने गोद ले रखा है। इस गांव में सड़क से लेकर शिक्षा, पानी और बिजली व्यवस्था के साथ ही लोहिया आवास बनवाए जा चुके हैं। ग्रामीणों को पेंशन योजना के लिए भी लाभार्थी हैं। इधर आंगनबाड़ी केन्द्र पर सौ से अधिक बच्चे पंजीकृत है जिसमें 28 बच्चे अति कुपोषित हैं। वहीं दूसरी ओर डीएम द्वारा जगत ब्लाक क्षेत्र के गांव पड़ौआ व दातागंज के भटौली गांव को गोद ले रखा है। वहीं इन दोनों गोद लिए गांव में भी शासन की सभी योजनाओं को संचालित कर रखा है वहीं आंगनबाड़ी के पहले केन्द्र पर 140 बच्चे पंजीकृत हैं तथा दूसरे पर 150 पंजीकृत हैं। इनमें पांच-पांच बच्चे अतिकुपोषित हैं।

इधर भटौली गांव में 39 बच्चे अतिकुपोषित हैं। इसी तरह से सीडीओ ने भी म्यांऊ का गांव चितौरा तथा दातागंज का गांव सैजनी गोद ले रखा है। जिसमें चितौरा में 18 तथा सैजनी में 4 बच्चे अतिकुपोषित हैं। इतना ही नहीं इन गोद लिए गांव में बिजली सप्लाई भी समय पर नहीं मिल रही है। वहीं स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में लापरवाही की जा रही है। इसके सबसे बड़ी समस्या गंदगी की बनी हुई है। वहीं गांव में बिछाई गई सड़के भी उखड़ने लगी हैं।

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  • Web Title:The situation of the villages for shedding millions and not improving lap