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9 दिसंबर, 2019|9:23|IST

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अपने भीतर के लीडर को जगाएं

ग्रुप डिस्कशन विशेषज्ञ कहते हैं कि आपको अपनी ज्ञान वृद्धि के साथ-साथ संप्रेषण क्षमता को भी विकसित करना चाहिए। तो पेश हैं कुछ उपाय, जो ग्रुप डिस्कशन (जीडी) में आपके काम आएंगे।

अपना ज्ञानकोश बढ़ाएं : जीडी में सफलता का पहला कदम अपना ज्ञानकोश बढ़ाने के साथ उठाया जाता है। सामयिक मुद्दों के लिए अखबार एवं पत्रिकाएं पढ़ें, खासकर सालाना अंक, जिनमें पूरे वर्ष का लेखा-जोखा होता है। टीवी पर समाचार और सामयिक मुद्दों पर आने वाले कार्यक्रम देखें।

आर्थिक विषयों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) संबंधी बुनियादी नियमों को जानें, स्टॉक मार्केट, उदारीकरण, रोजगार हालात, पूंजी परिवर्तनीयता, रुपए और डॉलर के बीच का अंतर, आयात-निर्यात और समाजवाद बनाम पूंजीवाद जैसे विषयों के बारे में भी जानकारी एकत्र करें।

विशेष सेक्टरों के विषयों में जैसे सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी आधारित सेवाओं, बैंकिंग, बीमा, रिटेल, टेलीकॉम, स्वास्थ्यसेवा, कृषि आदि पर एक-दो पेजों के नोट्स बनाने से शुरुआत करें। गत वर्ष हरेक क्षेत्र में हुए विकास और उम्मीदों पर नजर रखें।
विचार संप्रेषण : केवल ज्ञान ही काफी नहीं। अगला कदम अपनी संप्रेषण क्षमता को बेहतर बनाना होता है। जीडी जैसे माहौल में बोलने के लिए एक ग्रुप गठित करें, जो रोज मिले और किसी विषय पर बात करे।

प्राकृतिक छवि : सबसे बेहतर मंत्र होता है अपनी प्राकृतिक छवि को बरकरार रखना। जवाब देते हुए बनावटीपन न अपनाएं।

बोलें जरूर : जीडी में शामिल होने का एक महत्त्वपूर्ण नियम यह है कि आप उसमें बोलें जरूर। किसी भी जीडी में एक पेपर और पेन का इस्तेमाल तब तक जरूर करें, जब तक आपको उसे रोकने को न कहा जाए। बोलने से पूर्व दो मिनट तक उस मुद्दे पर विचार कर लें। बोलना तभी शुरू करें, जब आपने विषय को समझ और उसका आकलन कर लिया हो।

उन्मुक्त विमर्श करें : बारी-बारी बोलने से बचें, क्योंकि यह अप्राकृतिक होता है। जीडी में प्रतिभागियों के बीच उन्मुक्त विमर्श होना चाहिए। हालांकि अधिकांश जीडी में इस कारण शोर होता है, क्योंकि सभी अपनी बात कहना चाहते हैं, इसलिए बारी-बारी बोलने संबंधी सिफारिश नहीं माननी चाहिए।

डिस्कशन की शुरुआत और अंत : डिस्कशन की शुरुआत करना एक रिस्क-हाई रिटर्न स्ट्रेटेजी है। अधिकांश जीडी में शुरुआती स्पीकर को ही सबसे अधिक गैर-रुकावटी समय मिलता है। लिहाजा, आकलनकर्ताओं को शुरुआती स्पीकर्स का आकलन करने का श्रेष्ठ मौका मिलता है। यह एक दोधारी तलवार की तरह होता है। यदि शुरुआती स्पीकर पते की बात करता है तो वह समूह को सही दिशा देता है। यदि पहला स्पीकर हल्की बात करता है तो अपनी कमी के कारण उस पर आकलनकर्ताओं का कम ध्यान जाएगा, इसलिए पहले तभी बोलें, जब आपके पास कहने को जरूरी बात हो।

अंत में बोलना हो तो बात का ठीक से उपसंहार तलाशें। सार रूपी अंतिम बात में अपनी ही बात को पुन: न कहें। अन्य विचारों को भी उसमें स्थान दें। यदि समूह एकमत न हुआ हो तो उसे अपनी बात में रखें, लेकिन याद रखें किसी समझौते के बारे में अधिक जोर न दें। यह आपके खिलाफ भी जा सकता है।

विमर्श में शामिल होना : विमर्श में शामिल होने का तरीका खोजें। एक शोर-शराबे भरे जीडी में जहां कई लोग एक साथ बोल रहे हों, अन्य का अपनी बात रखना मुश्किल होता है। ऐसी समस्या का कोई निश्चित हल नहीं होता। ऐसी स्थिति असली जीडी में भी आपके सामने आ सकती है। इसके बावजूद यह जरूरी है कि आप बोलें। लेकिन आप ये कैसे करेंगे?

जीडी के आधार पर ही बिजनेस स्कूल किसी भी प्रत्याशी की काबिलियत आंकते हैं :

कंटेंट : दिए गए विषय पर आपको कितनी नॉलेज है। जितनी गहरी आपकी नॉलेज होगी, उतना ही बेहतर आप बोल सकेंगे।
स्पष्ट सोच : आपकी विश्लेषण क्षमता और सोच प्रक्रिया कितनी साफ है।

कम्युनिकेशन : बोलचाल की अंग्रेजी और गैर बोलचाल की क्षमता। आपकी वाणी ऊंची, साफ और बेहिचक होनी चाहिए।

ग्रुप बिहेवियर : आपके ग्रुप डायनेमिक्स कितने बेहतर हैं, मतलब आप कितनी आसानी से ग्रुप में घुलमिल जाते हैं।

नेतृत्व क्षमता : जीडी में अपनी देन से ही लीडर सामने आता है। नेतृत्व क्षमता का पता इस बात से चलता है कि जीडी के दौरान कोई समूह को नई दिशा की ओर या समझौते की ओर ले जाता है। लीडर ग्रुप को नई सोच देता है।

सफलता के मंत्र

अमिताभ शंकर, 99.97 प्रतिशत कैट 2008 में, आईआईएम कोझिकोड (2009-11) बैच

आपने ग्रुप डिस्कशन और व्यक्तिगत इंटरव्यू के लिए कैसे तैयारी की?

मैंने नकली जीडी और पीआई से अभ्यास शुरू किया। इससे मुझे असली प्रक्रिया का आभास हुआ और मुझे अपनी खूबियों और खामियों का भी अहसास हुआ। साथ ही, मैंने समाचार पत्र और पत्रिकाएं पढ़ीं, विशेषकर बिजनेस समाचार।

एमबीए आकांक्षुओं को जीडी और पीआई के क्या मंत्र सलाह रूप में देना चाहेंगे ?

जीडी और पीआई में सफलता दो क्षेत्रों के आधार पर मिल सकती है - ज्ञान और आत्मविश्वास। पहले के लिए ज्यादा से ज्यादा पढ़ने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। नकली जीडी और पीआई के आधार पर आप आत्मविश्वास भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आपको प्रक्रिया का आभास हो सकेगा।

हॉट टॉपिक

mbauniverse.com विशेषज्ञ सिद्धार्थ बालकृष्ण ने जीडी के एक संभावित विषय एब्स्ट्रेक्ट टॉपिक : रेड पर बात की-

इस तरह के एब्स्ट्रेक्ट टॉपिक में फोकस विश्लेषण की बजाय रचनात्मकता और कल्पनाशीलता पर होना चाहिए। निम्न सवालों पर सोचें : इस विषय पर आप कितने विचार रख सकते हैं? इस पर आप कितने तरीके से सोचते हैं? इस विषय पर सोचते हुए
आपके दिमाग में मुख्यत: क्या आता है ?

शुरुआत जोरदार तरीके से करने में फायदा होगा। उदाहरणार्थ, किसी कहावत से शुरुआत करें। जैसे कि शेक्सपियर ने कहा था, ‘नाम में क्या रखा है? गुलाब को किसी और नाम से पुकारें तो भी उसकी सुगंध वही रहेगी। इसी तरह से कह सकते हैं, ‘रंग में क्या रखा है?

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