जंतर मंतर पर किसानों का विशाल प्रदर्शन - जंतर मंतर पर किसानों का विशाल प्रदर्शन DA Image
16 दिसंबर, 2019|4:00|IST

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जंतर मंतर पर किसानों का विशाल प्रदर्शन

देशभर से बडी संख्या में आए किसानों ने आज जंतर मंतर पर धरना.प्रदर्शन किया और सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए इनकी कडी आलोचना की।
 
भारतीय किसान आंदोलन समन्वय समिति के बैनर तले एकत्रित हुए किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह टिकैत ने कहा कि केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का 2010-11 का बजट किसान विरोधी और बडे बडे औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत कृषि नीतियों से देश का किसान बहुत परेशान है और उसे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आगाह किया कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते देश के समक्ष खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है।
 
 समिति की तरफ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि डीजल और यूरिया की कीमतें बढाने के साथ-साथ उर्वरकों की कीमतों से नियंत्रण हटा लेने से कंपनियों को मनमाने ढंग से मूल्य निश्चित करने की छूट दे दी गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे कृषि की लागत बढ़ेगी और उसके परिणामस्वरुप किसानों पर रिण बढ़ेगा और किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होंगे।
 
टिकैत ने कहा कि 2010-11 के बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे देश में महंगाई को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्य पदाथरें की कीमतों में वृद्धि से किसानों में कुपोषण और भूखमरी की समस्या पैदा हो रही है।

  किसानों की पैदावार के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के वास्ते स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करना, किसानों के लिए सीधे आमदनी की सुविधा, खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और मजबूत करना, खाद्यान्नों के वायदा कारोबार पर रोक, किसानों को भूमि के आधार पर खाद्य सब्सिडी और किसानों के लिए ऋण सुविधा आसान बनाने के साथ साथ सभी प्रकार के कृषि ऋण चार प्रतिशत की ब्याज दर पर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
 
 इसके अलावा ज्ञापन में प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को क्षतिपूर्ति के लिए फसल बीमा, विकास परियोजनाओं और विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए खेती की भूमि का अधिग्रहण रोकना, कृषि विस्तार कार्यालयों को मजबूत करना, जीएमओ पर स्थाई प्रतिबंध लागू किया जाना और विश्व व्यापार संगठन तथा आसियान देशों और दक्षिण कोरिया के साथ मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने की मांग की गई है।

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