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14 नबम्बर, 2019|7:10|IST

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बदल रही है महिलाओं की दुनिया?

बदल रही है महिलाओं की दुनिया?

राजधानी दिल्ली की महिलाओं की सोच कितनी बदली है और कितने बदले हैं उनके नैतिक और सामाजिक मूल्य? हाल ही में कराये गये एक सर्वे के नतीजे काफी दिलचस्प तथ्यों की ओर इशारा करते हैं।

पश्चिमी परिधान पहनने वाली दिल्ली की अधिकांश युवा महिलाएं महिला आरक्षण बिल की दिशा में उठाये गये पहले कदम से खुश हैं। उनका मानना है कि इससे भारतीय समाज में महिलाओं को पहले के मुकाबले कहीं अधिक अधिकार प्राप्त होंगे, लेकिन इसके बावजूद वे उन तमाम मुद्दों पर उसी तरह घोर परंपरावादी दिखाई पड़ती हैं, जिस तरह दो तीन दशक पहले की लड़कियां दिखाई पड़ती थीं। दिल्ली की युवतियों के बदलते मूल्यों को जानने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर एक सर्वे किया गया, जिसमें अनेक दिलचस्प तथ्य सामने आए।

महिलाएं क्या चाहती हैं?

एचटी सिटी द्वारा 300 महिलाओं पर कराये गये इस सर्वे का संयोजन मार्केट एक्सेल डाटा मैट्रिक्स द्वारा किया गया। इसमें 20, 30 और 40 वर्ष की उम्र में चल रही महिलाओं से विभिन्न चीजों के बारे में उनके एटीट्यूड के बारे में पूछा गया। परिवार, समाज और अपनी छवि पर पूछे गये सवालों से यह तथ्य सामने आया कि इस वक्त बीसवें साल में चल रहीं लड़कियां एक दशक पहले की लड़कियों से अलग नहीं हैं। आज की लड़कियों की रोल मॉडल कैटरीना कैफ हैं और बीस साल पहले की लड़कियों की रोल मॉडल माधुरी दीक्षित हुआ करती थीं। उससे कुछ पहले लड़कियों की रोल मॉडल हेमा मालिनी और रेखा थीं।
एक दशक पहले तक 65 फीसदी दिल्ली की महिलाएं ही अपने खर्चे खुद चलाती थीं, यह प्रतिशत अब बढ़ कर 70 हो गया है। पिछले 20 सालों में पोर्न फिल्में देखने वाली महिलाओं की संख्या भी 14 से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गयी है और प्रेम के मामले में पहल करने वाली लड़कियों का प्रतिशत भी दो दशकों में 9 से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है। एक सप्ताह में वेस्टर्न ड्रेसेज पहनने वाली लड़कियों का प्रतिशत इन दो दशकों में 10 से 46 फीसदी हुआ।

कुछ अन्य दिलचस्प ट्रैंड्स

महिलाओं में सिगरेट पीने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। 20 वर्ष की उम्र की अधिकांश लड़कियों का मानना है कि वे सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट या शराब पीने में असहज महसूस नहीं करतीं।

20-29 साल की 73 फीसदी महिलाओं ने माना कि वे अपने पति या मेल पार्टनर से ज्यादा कमाने पर असहज हो जाती हैं, जबकि चालीस की उम्र में चल रही महिलाओं ने माना कि जब वे 20 साल की थीं तो वे इस स्थिति में भी सहज रहा करती थीं।

89 फीसदी लड़कियों का मानना था कि वे अपने से छोटे लड़के से शादी करने के पक्ष में नहीं हैं। चालीस की उम्र में चल रही महिलाओं का कहना था कि जब वे 20  साल की थीं तो उनकी सोच भी यही थी।

20 की उम्र की 45 फीसदी महिलाओं का मानना था कि उन्हें अपने भाइयों के बराबर मौके मिलते हैं, जबकि 40 वर्ष की उम्र की 56 फीसदी महिलाओं का कहना था कि जब वे 20 वर्ष की थीं तो उनके पास काम के समान अवसर थे। विशेषज्ञों का कहना था कि बेशक महिलाएं ड्रिंक, स्मोकिंग और विवाहेतर संबंधों में यकीन करती हैं, लेकिन वे इसे स्वीकार नहीं करतीं।
मनोचिकित्सकों का मत है कि भारतीय समाज महिलाओं को अपनी परंपरागत छवि ही प्रोजेक्ट करने के लिए दबाव डालता है, इसलिए यदि वे इन सारे कामों में शामिल भी होती हैं, तब भी वे इन्हें स्वीकार नहीं करना चाहतीं। लड़कियां कहती हैं कि शादी से इतर संबंधों को वे गलत मानती हैं। उनके लिए शादी एक प्रतिबद्धता है, जिसे हर हाल में पूरा करना चाहिए।

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