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12 नबम्बर, 2019|1:26|IST

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कनिष्क मामला: कनाडा की अदालत ने खारिज की जूरी

कनिष्क मामला: कनाडा की अदालत ने खारिज की जूरी

कनाडा की एक अदालत ने इंदरजीत सिंह रैयत के गवाही से मुकरने के मामले में सुनवाई के लिए बनी जूरी को खारिज कर दिया है।
   
रैयत एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जिसे 1985 में एयर इंडिया के विमान को विस्फोट से उड़ा देने (कनिष्क मामला) के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। न्यायमूर्ति मार्क मैकईवन ने सोमवार को किसी साक्ष्य पर सुनवाई करने से पहले ही जूरी को खारिज कर दिया, जहां रैयत झूठी गवाही के मुकदमे का सामना करने के लिए पेश हुआ था।

प्रकाशन प्रतिबंधों की शर्तों के चलते जूरी को खारिज करने के कारण के बारे में खबर नहीं दी जा सकती। 15 मार्च से अब एक नई जूरी चुनी जाएगी। खारिज की गई जूरी पिछले हफ्ते एक कठिन प्रक्रिया के जरिए चुनी गई थी।
   
जेल में 15 साल से अधिक वक्त गुजराने के बाद रैयत पिछले साल रिहा हो गया था। वह संदिग्ध रिपू दमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी पर चल रहे मुकदमे के दौरान 27 बार झूठ बोलने के आरोपों का सामना कर रहा है, जिन्हें 2005 में हत्या एवं षडयंत्र के आरोपों से बरी कर दिया गया था। झूठ बोलने के मामले में दोषी साबित होने पर उसे अधिकतम 14 साल तक की कैद हो सकती है।

एयर इंडिया की मांट्रियल से दिल्ली आ रही उड़ान संख्या 182 को 23 जून, 1985 को आयरलैंड के तट के उपर बीच हवा में विस्फोट से उड़ा दिया गया था, जिसमें सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। इस हमले के कथित मास्टरमाइंड तलविंदर सिंह परमार को 1992 में भारत में पुलिस ने मार गिराया था।

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