पत्राचार शिक्षा संस्थान कर्मियों को वेतन के लाले - पत्राचार शिक्षा संस्थान कर्मियों को वेतन के लाले DA Image
11 दिसंबर, 2019|6:45|IST

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पत्राचार शिक्षा संस्थान कर्मियों को वेतन के लाले

इविवि के पत्रचार शिक्षा संस्थान के कर्मचारियों की हालत खराब है। तीन महीने हो गए यहां के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। इनका होली जैसा महत्वपूर्ण त्योहार भी फीका ही गुजरा। अब परेशानी काफी बढ़ गई है क्योंकि ज्यादातर कर्मचारियों की गाढ़े वक्त के लिए जमा की गई पूंजी भी समाप्त हो गई है। तनख्वाह कब मिलेगी, यह भी तय नहीं है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी इविवि ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।

संस्थान के निदेशक ने दूरस्थ शिक्षा परिषद और मानव संसाधन विकास मंत्रलय को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराते हुए बजट की मांग की है। सूत्रों का कहना है कि इसमें भी एक पेंच फंस गया है क्योंकि दूरस्थ शिक्षा परिषद से संस्थान को मिली मान्यता अस्थाई है। अब स्थाई मान्यता के लिए भी लिखा-पढ़ी की जा रही है।
इस संस्थान से 126 अधिकारी, कर्मचारी जुड़े हुए हैं। इसमें 69 बाबू, 22 चपरासी, तीन मशीन मैन, दो सहायक निदेशक, दो सुरक्षाधिकारी, 14 पत्रचार अधिकारी शामिल हैं।

दूरस्थ शिक्षा के जरिए बीए और बीकॉम की डिग्री देने के लिए स्थापित यह केंद्र एक समय में आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालय को उधार रकम देता था। दो साल से स्थिति ऐसी हो गई है कि संस्थान के निदेशक को कर्मचारियों का वेतन देने के लिए इविवि के कुलपति के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है।

पिछले वर्ष फरवरी, मार्च में ऐसी ही स्थिति आई थी तो कर्मचारियों ने आंदोलन किया था। इसका असर यह हुआ कि तत्कालीन निदेशक प्रो. पीके साहू को हटा दिया गया था। इविवि ने वेतन, भत्ता का भुगतान करने के लिए संस्थान को 78 लाख रुपये उधार दिए थे। उसी समय भूगोल विभाग के प्रो. बीएन मिश्र को निदेशक का जिम्मा सौंपा गया था। इविवि से मिली रकम नवंबर में ही समाप्त हो गई। लिहाजा दिसंबर से वेतन का भुगतान बंद हो गया।

उम्मीद थी कि इविवि प्रशासन होली को देखते हुए कुछ करेगा। इस कारण कर्मचारी चुप थे पर ऐसा नहीं हुआ। जमा पूंजी से कर्मचारियों ने अभी तक किसी तरह से काम चलाया। अब कर्मचारियों की हालत खराब होने लगी है। कर्मचारी आंदोलन करने के मूड में नहीं है, शायद यही वजह है कि इनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। कर्मचारियों की हालत यह है कि अब दुकानदार ने उन्हें उधार समान देना बंद कर दिया है तो जो कर्मचारी किराए के मकान में रहते हैं, उन्हें काफी जलालत झेलनी पड़ रही है।

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