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22 नवंबर, 2019|3:59|IST

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दुष्कर्म के मामले में अनोखा फैसला

दस साल की बच्ची से दुष्कर्म के एक मामले में अदालत ने अनोखा फैसला सुनाया है। अमूमन दुष्कर्म का आरोप साबित होने पर कैद और जुर्माने की सजा सुनाई जाती है। लेकिन इस मामले में अदालत ने एक अहम निर्णय सुनाते हुए दुष्कर्मी को निर्देश दिए हैं कि नाबालिग पीड़िता के ववाह योग्य होने तक उसे प्रतिमाह 5 सौ रुपये गुजाराभत्ता अदा करे। साथ ही अदालत ने दुष्कर्मी चंद्रपाल को दस साल कैद एवं 11 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्मानाराशि पीड़िता को मुआवजास्वरुप दी जाएगी।


कड़कड़डूमा स्थित एडिशनल सेशन जज गुरदीप सिंह की अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि ‘एक तरफ हमारे देश में औरत को देवी के रूप में पूजा जाता है। वहीं, दूसरी तरफ बहन-बेटियों के साथ दुष्कर्म जैसे अपराध होते हैं। इस अपराध से न केवल महिला को शारीरिक चोट पहुंचती है, बल्कि आत्मिक ठेस भी लगती है। उस पर भी यदि यह अपराध किसी बच्ची के साथ होता है, तो ताउम्र बच्ची उस हादसे को भुला नहीं पाती। इस तरह के अपराध को अंजाम देने वाला मुजरिम कठोर सजा का ही हकदार है।’

अभियोजन पक्ष के अनुसार करावल नगर क्षेत्र में रहने वाले जगदीश(बदला हुआ नाम) ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी बेटी दस साल की बेटी 16 मई 2009 की दोपहर छत पर स्थित शौचालय में गई थी। तभी पड़ोसी चंद्रपाल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। लड़की की चीख सुनकर एक पड़ोसन छत पर पहुंची और उसने अभियुक्त को कुकृत्य करते हुए देखा। अभियुक्त डर का वहां से फरार हो गया। जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। अदालत ने पेश तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त चंद्रपाल को दस साल कैद की सजा सुनाईहै।

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