सेहत और चेतना का रिश्ता - सेहत और चेतना का रिश्ता DA Image
9 दिसंबर, 2019|11:56|IST

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सेहत और चेतना का रिश्ता

हम दिन भर कुछ न कुछ करते रहते हैं। चलते-फिरते हैं। उठते-बैठते हैं, लेकिन अगर हम सचेत होकर वह सब करें तो हमारे तन मन पर गजब का फर्क पड़ सकता है यानी अपने भीतर बस यह दर्ज हो जाए कि हम जो कर रहे हैं उससे हमारा तन-मन बेहतर हो रहा है।

जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ. टॉड बी. काशदां का मानना है कि हमारे चलने, फिरने और काम करने में अच्छी खासी एक्सरसाइज हो जाती है, लेकिन अगर हम उसे करते हुए जानते हैं कि क्या कर रहे हैं तो उसका असर ही अलग होता है।
डॉ. काशदां एक रिसर्च का हवाला देते हैं। होटल में कुछ झाड़-पोंछ का काम करने वालों पर यह रिसर्च थी। ये लोग अच्छी-खासी शारीरिक मेहनत करते हैं, लेकिन वे उतने फिट नहीं थे जितना इतनी एक्सरसाइज करने वालों को होना चाहिए था। अब उन लोगों से बात की गई। उन्हें बताया गया कि अगर वह सचेत होकर ये काम करें और महसूस करें कि काम करते हुए खास एक्सरसाइज हो रही है, तो उन पर अलग तरह का असर होगा। उन लोगों ने जब सचेत होकर वह काम किया तो उनकी फिटनेस कमाल की बढ़ गई। एक महीने में कई लोगों का वजन 5 से 10 किलो तक कम हुआ।
बौद्ध लोग मानते हैं कि जागरूक रहने से जिंदगी में फर्क पड़ता है। मशहूर बौद्ध विचारक तिक न्यात हन्ह तो हर काम में जागरूक होने की बात करते हैं यानी हम जो भी करें।
वह समझ-बूझ कर करें या हम जो कर रहे हैं उसके लिए सचेत हों। मसलन हम चल रहे हैं और अगर यह चलना हमारी चेतना से जुड़ रहा है, तो वह ध्यान के स्तर पर चला जाएगा। उसी से चलने का असर हमारे शरीर पर दोगुना हो जाएगा।

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