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13 नबम्बर, 2019|10:35|IST

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धन्यवाद चैनलिया बुद्घिजीवियो!

शाबाश राहुल! ऐसे ही चलते रहे तो इस देश में दूल्हों की कमी नहीं होगी। शायद यह जानकर देशवासियों को तकलीफ हो रही है कि एक दूल्हे के लिए देश भर से इतनी दुल्हनियों ने आवेदन कर दिया? तब भी कहा जाता है कि देश में स्त्री-पुरुष अनुपात खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है? नहीं, नहीं, आपका स्वयंवर देखकर तो ऐसा लगा मानो देश में एक नई सामाजिक और सांस्कृतिक क्रांति हो गयी! राखी का स्वयंवर तो खैर, भारतीय सभ्यता और संस्कृति की नकल थी यानी हमारे आर्यवर्त में युवरानियों के लिए ही स्वयंवर रचे जाते रहे लेकिन आपका स्वयंवर इस मामले में भारत के लिए सभ्यता, संस्कृति और इतिहास को आइना दिखाते हुए एक क्रांतिकारी पहल का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
धन्य हैं, हमारे देश के टीवी संचालक और उसे आइडिया सप्लाई करने वाले स्वनामधन्य बुद्धिजीवी! जिनकी कृपा से अब तक समाज के आंचल में इठलाने वाली हमारी परंपराएं हमारे लिए मनोरंजन का साधन और टीवी उद्योग के लिए कमाई का समुद्र बन गयी हैं। यदि ऐसे ही नए-नए आइडियाज हमारे स्वनामधन्य बुद्धिजीवी ईजाद करते रहने के सफल प्रयास में जुटे रहे तो अब हनीमून के रोमांचक पल, नौ महीने की ममता और प्रसव की वेदना का बाजार भी उन्हें ज्वालामुखी की तरह धन वर्षा कराने को तैयार मिलेगा।
निशिकांत, विकासनगर

सैनिक कल्याण-अपर्याप्त कदम
उत्तराखंड राज्य में देश के सर्वाधिक पूर्व सैनिक और सैन्य परिवार वास करते हैं। परम्परागत रूप में पहाड़ की अर्थव्यवस्था को मनी आर्डर आधारित माना जाता है जिसका मुख्य आधार सेवारत सैनिकों का वेतन तथा पूर्व सैनिकों की पेंशन होती है। हाल ही मुख्यमंत्री द्वारा सैनिकों के कल्याण की कई घोषणाएं की गई है, परन्तु वास्तविक धरातल पर इनका लाभ कितने लोगों तक पहुंचता है यह महत्वपूर्ण है। अच्छा हो यदि सरकार मात्र वाह-वाही लूटने के लिए घोषणाएं करने के बजाए मौजूदा कल्याण कार्यक्रमों को ईमानदारी से लागू करे। लंबे अर्से से राज्य के पूर्व सैनिक शिक्षकों की नियुक्ति में 45 वर्ष की अधिकतम आयुसीमा को समाप्त करने, 60 वर्ष की आयु तक सुनिश्चित पुनर्वास तथा पूर्व सैनिकों की संख्या के अनुपात में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे है। परन्तु सरकार मानों कान में तेल डाले सोई है। चुनावों के वक्त झूठी घोषणाओं तथा पूर्व सैनिकों को फुसलाना राजनैतिक दलों की चुनावी नीति बन गयी है। दुर्भाग्यवश सत्ता की मलाई चाट रहे अनेक वरिष्ठ पूर्व सैनिक अधिकारी भी जवान स्तर के पूर्व सैनिकों के प्रति सरकारी उपेक्षा का प्रभावी विरोध नहीं कर रहे है।
श्याम कुमार त्यागी, रुड़की

सचिन को बधाई
फरवरी को ग्वालियर में दूसरे एकदिवसीय मैच में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध सचिन ने अविजित 200 रन बनाकर अपने कीर्तिमानों की कड़ी में मानो कोहिनूर हीरा ही जड़ लिया, लेकिन दुख और क्षोभ की बात यह है कि अंतिम तीन ओवरों में सचिन को मात्र तीन गेंदें खेलने को मिलीं। धोनी जिस तरह सारा ओवर खेलकर सचिन को बल्लेबाजी का मौका नहीं दे रहे थे वैसी स्थिति में अगर 50वें ओवर की दूसरी गेंद पर भी चौका हो जाता तो शायद सचिन 199 पर दूसरे छोर पर खड़े रह कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने से वंचित ही रह जाते। अगर उन्हें कुछ और गेंदें खेलने को मिलतीं तो वे 210-215 भी बना सकते थे। क्या यही टीम स्प्रिट है? पहले मैच में सहवाग ने उन्हें रन आउट करवा दिया जबकि सहवाग चाहते तो अपना विकेट कुर्बान कर सकते थे। उधर बांग्लादेश सीरीज में एक मैच में दिनेष कार्तिक ने ताबड़तोड़ रन बनाकर सचिन को शतक से वंचित कर दिया था। पाकिस्तान में भी उसके खिलाफ जब वे 196 रन पर थे तभी आनन-फानन में पारी घोषित कर दी गई थी। व्यक्तिगत रिकॉर्ड टीम के प्रदर्शन से ऊपर नहीं है लेकिन कोई खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाने की स्थिति में हो और टीम पर कोई खतरा नहीं हो तो उसे वैसा करने का पूरा सहयोग देना चाहिए। 
निखिलेश पाठक, हरिद्वार          

जमाखोरी पर अंकुश जरूरी
एक तरफ आम जनता महंगाई के कारण भुखमरी के कगार पर है तो वहीं जमाखोर ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में खाद्यान्नों के स्टाक पर कुंडली मारे बैठे हैं। देश भर में हाल ही में जमाखोरी के कई मामले सामने भी आए हैं। तमाम जगहों से चीनी और दाल के स्टाक मुक्त कराये गये। ऐसे कई और लोग अभी हैं जो मुनाफा कमाने के लिए तय सीमा से अधिक माल स्टाक कर लेते हैं। जमाखोरों के कारण महंगाई पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
शिवप्रकाश शर्मा, हल्द्वानी

स्वावलंबन को बढ़ावा मिले
देश में शिक्षित युवाओं की विशाल फौज है। ऐसे में सबके लिये नौकरियां मुहैया करना बेहद मुश्किल है। इस वजह से बेरोजगारी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही  है। देश में बढ़ती बेरोजगारी पर अगर अंकुश लगाना है तो युवाओं में स्वावलंबन को बढ़ावा दिया जाये। इसके लिए छात्रों को स्कूली दिनों से ही वोकेशनल ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों को इस ओर प्राथमिकता से प्रयास करना चाहिये।  
सोहल सिंह, देहरादून

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