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20 नबम्बर, 2019|12:06|IST

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बाकी हैं और भी आसमां

महिलाएं सफलता की ओर निरंतर अग्रसर हो रही है। घर की देहरी से बाहर निकलकर महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में ना सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज की है, बल्कि कामयाबी के इस सफर में उन्होंने पुरुषों के वर्चस्व को भी कड़ी चुनौती दी है। राजनीति हो या अंतरिक्ष, ब्यूटी हो या फिर बिजनेस उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा हर क्षेत्र में मनवाया है। खासतौर पर वर्तमान में कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होकर वह भारत को आगे ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।

भारत की प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति के पद पर प्रतिभा पाटिल आसीन हैं, सोनिया गांधी की गिनती विश्व की पावरफुल महिलाओं में होती हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री तीसरी बार इस पद का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, उत्तर प्रदेश में मायावती की उपस्थिति बड़े-बड़े राजनीतिक दलों के समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। 

इस पर पहली बार लोकसभा के स्पीकर पद पर आसीन मीरा कुमार, संसद की गरिमा को संभालने के लिए बिफरते सांसदों को चुप्प करने की क्षमता रखती है। ऐसे में महिलाओं के कौशल और प्रतिभा पर किसी तरह का प्रश्न उठाना जायज नहीं लगता।
  
सफलता के इस पड़ाव में लेकिन अभी भी कई ऐसे पद हैं जिन पर महिलाएं फिलहाल आसीन नहीं हुई हैं। इनमें से कुछ पदों से दूरी का कारण वर्तमान नियम हैं, जो शारीरिक और मानसिक योग्यता के आधार पर महिलाओं को उन भूमिकाओं को निभाने से रोकते हैं। तो कई पदों का खाली होना महिला विकास की धीमी प्रगति और देर से  शुरु हुई प्रक्रिया से जुड़ा है। 

इसलिए उनकी योग्यता पर प्रश्न चिह्न् या फिर लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाना यहां उचित नहीं ठहरता खासतौर पर जब देश के सर्वोच्च पदों पर महिलाएं आसीन हों। ऐसे में विकास और तरक्की की जिस रफ्तार से महिलाएं आगे बढ़ रही हैं, उससे आने वाले यह पद भी अधिक समय तक महिलाओं से दूर नहीं रह सकेंगे। फिलहाल ऐसे ही पदों पर एक नजर:

-  स्थल सेना, नौ सेना और वायु सेना के तीनों अंगों में ही सर्वोच्च पद पर अभी तक महिलाओं की नियुक्ति नहीं हुई है।

-  फाइटर पायलट के तौर पर महिलाओं की नियुक्ति नहीं की जाती। वह हेलीकॉप्टर और एयरक्राफ्ट ही चलाती हैं, युद्धस्थल पर फिलहाल उन्हें नहीं भेजा जाता

-  नौ सेना में युद्ध पोत पर महिलाओं अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होती। 

-  चुनाव आयुक्त, केबिनेट सेक्रेटरी और योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद पर भी महिला उम्मीदवार का नियुक्त होना अभी बाकी है।

-  भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर पद पर भी अभी तक कोई महिला आसीन नहीं हुई है।

-  रॉ, आईबी और सीबीआई जैसी सरकारी खुफिया एजेंसियों के शीर्ष पदों पर भी अब तक महिलाएं नहीं पहुंची हैं। 

_  इसरो और इयूका जैसे प्रमुख वैज्ञानिक केंद्रों के उच्च पदों पर भी महिलाओं की उपस्थिति नगण्य है।

_  सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश के पद पर भी अभी तक कोई महिला आसीन नहीं हुई है।

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