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21 नबम्बर, 2019|4:45|IST

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रंग ले ही आई मां की लड़ाई


गरीब व लाचार शकु न्तला अपने गूंगे बहरे बेटे की हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए दो माह तक थाने के चक्कर काटती रही, लेकिन उसकी सुनने वाला वहां कौन था। उसे हर बार पुलिस का टालू रवैया ङोला पड़ा, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अंत में अदालत का दरवाजा खटखटाया। नारी शक्ति की हिम्मत और जज्बा रंग लाया और दो माह बाद वह अपनी लड़ाई जीतने में सफल हो सकी। अदालत के आदेश पर न्यू उस्मानपुर पुलिस ने हमलावर मनीष कुमार व अन्य के खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया है।

जगजीत नगर बसंत गली में रहने वाली शकुन्तला विधवा है। वह किराये के मकान में रहती है और कपड़ों पर प्रैस कर अपने परिवार को पालन पोषण कर रही है। दो बेटे राजकुमार और उसके दो बेटे हैं। उसका एक बेटा राजकुमार जो कि गूंगा बहरा था और दूसरा नवीन है। गत 24 दिसम्बर की शाम को राजकुमार घर आया तो उस पर एक और ताला लगा हुआ था।

राजकुमार व उसकी मां ने मकान मालिक मनीष से कहा कि वह किराया दे देगी, लेकिन वह ताला खोल दे। इस बात पर मनीष व शकु न्तला के बीच कहासुनी हो गई तो राजकुमार ने इशारे हस्तक्षेप किया। इसी दौरान मनीष ने अपने दो साथियों की मदद से राजकुमार को पकड़ कर उसके पेट में चाकू घोंप दिया और साथियों के साथ भाग निकला।

नवीन व अन्य लोग घायल राजकुमार को जीटीबी अस्पताल ले गए जहां पांच जनवरी को उपचार के दौरान राजकुमार की मौत हो गई। इधर मां शकुन्तला जब भी न्यू उस्मानपुर थानाध्यक्ष के पास   जाती तो उनका रवैया टालू रहता। शकुन्तला मामले को कड़कड़डूमा अदालत की न्यायधीश शिवाली शर्मा की अदालत में ले गई। जहां आखिरकार बुजुर्ग व विधवा मां अंत में लड़ाई जीत गई। 

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