बिजलीघर पर केन्द्र-यूपी में टकराव - बिजलीघर पर केन्द्र-यूपी में टकराव DA Image
20 नबम्बर, 2019|12:56|IST

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बिजलीघर पर केन्द्र-यूपी में टकराव


विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर केन्द्र और उत्तर प्रदेश के बीच चल रही तनातनी की सूची में सोनभद्र के दोपाहा में लग रहा 1320 मेगावाट का बिजलीघर भी शामिल हो गया है। सूत्रों के मुताबिक केन्द्र ने इसकी पर्यावरणीय मंजूरी देने से फिलहाल मना कर दिया है जिसपर तीखा विरोध जताते हुए उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन ने कड़ा पत्र लिखा है।

सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय वन और पर्यावरण मंत्रलय ने यह कहते हुए मंजूरी देने से इनकार किया है कि सोनभद्र से लगे सिंगरौली इलाके में तमाम बिजलीघरों की पहले से मौजूदगी के कारण पर्यावरण पर हो रहे असर के आकलन का काम चल रहा है। लिहाजा अगले आठ महीने तक उसी इलाके में किसी और बिजलीघर से सम्बंधित कोई मंजूरी नहीं दी जाएगी। ध्यान रहे कि सोनभद्र-सिंगरौली इलाके में कोयला खदानों की बड़ी संख्या के कारण वहाँ कई ताप बिजलीघर हैं और करीब दस हजार मेगावाट बिजली बनती है।

केन्द्रीय मंत्रलय के रुख का विरोध करते हुए लिखे गए पत्र में पावर कार्पोरेशन ने कहा है कि सिंगरौली करीब तीस किलोमीटर दूर है। ऐसे में वहाँ के पर्यावरणीय असर का हवाला देते हुए दोपाहा परियोजना में अड़ंगा नहीं डाला जाना चाहिए। यूपी ने कहा है कि सिंगरौली इलाके में जो बिजलीघर हैं उनमें ज्यादातर केन्द्रीय संस्था एनटीपीसी के हैं। जबकि कोयला खदानों के मुहाने पर सोनभद्र में यूपी की अनपरा और ओबरा परियोजनाएँ ही हैं।

बिजली की किल्लत ङोल रहे यूपी के लिए कोयला खदानों की बजाए दूर कहीं परियोजना लगाना लागत बढ़ाएगा और लोगों की बिजली महँगी होगी। इतना ही नहीं दोपाहा में जहाँ परियोजना लगनी है वहाँ प्रदूषण न्यूनतम है। सोनभद्र और सिंगरौली के बीच बड़ा जलाशय भी है। ऐसे में सिंगरौली के बहाने से सोनभद्र में परियोजना न लगने देना बेमानी है। 

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