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13 नबम्बर, 2019|12:56|IST

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गरीबों ने छोड़ दी छत पाने की आस


ग्राम पंचायत से सरकारी आवास के लिए पात्र तय होने के बाद बिलखेत की राजी देवी, लक्ष्मी देवी व गेंदालाल आदि को उम्मीद थी कि अब वे छत के लिए मोहताज नहीं रहेंगे, लेकिन इनके प्रस्ताव फाइलों में ही अटक कर रह गए हैं। मकान के अभाव में पड़ोसियों के घरों में शरण लिए इन गरीबों की उम्मीदें अब मुरझाने लगी हैं।

गरीबों, निराश्रितों व अनुसूचित जाति के लोगों के कल्याण के लिए चलाई जाने वाली सरकारी योजनाएं हवाई साबित होने लगी हैं। कहने को तो सरकार द्वारा भवनहीनों के लिए अटल आवास व दीनदयाल आवास योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जरूरतमंदों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

नयारघाटी के कल्जीखाल विकासखंड के अंतर्गत आने वाले बिलखेत गांव के जरूरतमंदों की कहानी इन योजनाओं की हकीकत स्वयं बयां कर रही है। बीपीएल श्रेणी में आने वाले अनुसूचित जाति की राजीदेवी, लक्ष्मीदेवी, गेंदा लाल, दिगबंरलाल व शिवचरण आदि सरकारी आवास के लिए विकासखंड कार्यालय व बहुउद्येशीय शिविरों के चक्कर लगाते थक गए हैं।

ग्राम पंचायत द्वारा भी इन जरूरतमंदों को अटल व दीनदयाल आवास योजना हेतु चयनित कर प्रस्ताव संबंधित कार्यालयों तक भेज दिए गए है, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो पाई है। लक्ष्मी देवी का मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से उन्होंने पड़ोस के घर में शरण ले रखी है। सरकारी आवास के लिए सभी मानकों को पूरा करने के बावजूद अनुसूचित जाति के इन परिवारों को आवास मुहैया नहीं कराया जा रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता रमेशचंद्र ने बताया कि इन फरियादियों द्वारा गत वर्ष अगस्त माह में घंडियाल में आयोजित जनता दरबार में जिलाधिकारी के समक्ष अपनी मांग रखी थी, लेकिन अभी तक उनके आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है।

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