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शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करेंगे: सिब्बल

शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करेंगे: सिब्बल

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार ने भारत को दुनिया के ज्ञान की महाशक्ति बनाने के लिए समूची शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने का बीड़ा उठाया है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को हम अगले दशक की ज्ञान की महाशक्ति बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश को ज्ञान की महाशक्ति बनाने की चुनौती को देखते हुए हम यहां की पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यवस्थित ढंग से आमूलचूल परिवर्तन कर रहे हैं। हमारी सरकार इन चुनौतियों एवं प्रयासों को स्वीकार कर शिक्षा के क्षेत्र में पहले की तुलना में अधिकाधिक निवेश कर रही है।

सिब्बल ने कहा कि जहां दसवीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र सरकार ने बजट का 7.7 प्रतिशत ही हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया था वहीं 2007-12 की ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा पर बजट की 11 प्रतिशत राशि खर्च की जा रही है। रूपयों के हिसाब से शिक्षा पर अब लगभग पांच गुना अधिक व्यय किया जा रहा है।

कपिल सिब्बल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इतना अधिक व्यय करने का उद्देश्य देश को सभी क्षेत्रों में आगे ले जाने के लिए एक बड़ा शिक्षित वर्ग तैयार करना है। अभी हाल तक हाईस्कूल पास करने वाले 100 विद्यार्थियों में से सिर्फ 12 ही स्नातक उपाधि प्राप्त कर पाते थे जबकि हम इस संख्या को कम से कम 30 तक ले जाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा देश कषि प्रधान अर्थव्यवस्था से सेवा प्रधान अर्थव्यवस्था में परिवर्तित हो गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है। विश्व ज्ञान अर्थव्यवस्था में शिक्षा की महती भूमिका हो गई है। शिक्षा लोगों और देशों के बीच खाई पाटने का एक बड़ा साधन बनके उभरी है।

निजी शिक्षण संस्थाओं की समस्याओं की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी अनेक संस्थाओं में छात्रों तथा प्रबंधन के बीच तथा अनेक मामलों में अध्यापकों एवं प्रबंधन के बीच अनेक मुद्दों पर मुकदमेबाजी चल रही है। उन्होंने कहा कि हम शैक्षिक ट्रिब्यूनल गठित करने जा रहे हैं जो ऐसे विवादों का शीघ्र निपटारा करेंगे।

सिब्बल ने कहा कि अनेक निजी व्यवसायिक शिक्षण संस्थान डोनेशन और कैपिटेशन फीस के नाम पर गलत ढंग से छात्रों से पैसा वसूलने का काम कर रहे हैं जिस पर लगाम लगाने के लिए उचित कानूनी व्यवस्था करने की तैयारी सरकार कर रही है।

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