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9 दिसंबर, 2019|9:24|IST

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विधेयक को बहुमत का समर्थन हासिल है

महिला आरक्षण बिल को संसद में पेश करने की फिर एक बार तैयारी है। पिछले अनुभव बताते हैं कि यह बिल जब कभी भी संसद में पेश किया गया इस पर काफी हल्ला हंगामा हुआ। देश में कई ऐसे दल हैं जो इसे वर्तमान रूप में किसी भी कीमत पर पास ही नहीं पेश भी नहीं होने देना चाहते। ऐसे में देश की उन महिला सांसदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है जो इसे पारित कराने के लिए लंबे समय से सक्रिय हैं। संसद की विधि और न्याय मामलों की समिति की अध्यक्ष जयंती नटराजन ऐसी महिला नेताओं में से हैं।

क्या इस बार महिला आरक्षण बिल पास हो सकेगा?
यह देश की सभी महिलाओं के लिए बेहद खुशी का पल होगा। हम चाहते हैं कि बिल पारित हो और महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण मिले। महिलाएं लंबे वक्त से इस विधेयक के पारित होने का इंतजार कर रही है।

आप कांग्रेस की सांसद और प्रवक्ता हैं। सारे समीकरणों को देखते हुए क्या आपको इसके पारित होने का पक्का यकीन है?
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में महिला आरक्षण का वादा किया है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की फेहरिस्त में यह विधेयक सबसे ऊपर है। मुझे यकीन है कि कांग्रेस अपना वादा जल्द पूरा कर लेगी।

आप संसद की विधि एवं न्याय मामलों की समिति की अध्यक्ष भी हैं। इसी समिति ने महिला आरक्षण विधेयक पर विचार किया था। आपकी मुख्य सिफारिश क्या थी?
समिति की सबसे पहली सिफारिश यह थी कि विधेयक को बिना किसी देरी के संसद में पारित किया जाए। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण से बराबरी का वह हक मिलेगा जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार है। हमने अपनी रिपोर्ट पिछले साल दिसंबर में सरकार को सौंप दी थी।

सपा, राजद और बसपा विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रही हैं। मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव चाहते हैं कि आरक्षण में पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए आरक्षण हो?
यह उनकी अपनी राय है। विधि और न्याय मामलों की समिति ने सभी पार्टियों से इस मसले पर राय ली थी।

समिति की अध्यक्ष होने के नाते क्या आप मानती हैं कि सपा और राजद का रवैया गलत है?
कांग्रेस ने वर्ष 2004 के विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण का वादा किया था। कई वर्षो तक आम राय बनाने की कोशिश की गई। मई 2008 में विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया और स्थाई समिति को भेज दिया गया।

क्या आप मानती हैं कि आरक्षण से महिलाओं की नीति और फैसलों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी?
बिल्कुल, मुझे यकीन है कि महिलाओं के सशक्तिकरण में यह एक और ऐतिहासिक फैसला होगा। समिति भी अपनी रिपोर्ट में कह चुकी है कि यह आम राय है कि महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए। सभी चाहते हैं कि नीति और फैसलों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए।

विधेयक को बिना बाधा के सदन में पारित करवाने के लिए सत्ता पक्ष ने क्या ऐहतियाती प्रबंध किए हैं?
यह दायित्व संसदीय कार्यमंत्री का है कि विधेयक को समर्थन देने वाले दलों के बीच कैसे जरूरी समन्वय बिठाते हैं। जहां तक बहुमत का सवाल है, राज्यसभा में विधेयक को समर्थन देने वाली पार्टियों का समुचित बहुमत मौजूद है।

विधेयक पारित होने की सूरत में श्रेय कौन लेगा? कांग्रेस पार्टी या वे सभी दल जो इसका समर्थन करेंगे?
कोई भी विधेयक पारित होता है तो इसका श्रेय पूरे सदन को जाता है, किसी पार्टी विशेष को नहीं। मेरा मानना है कि राज्यसभा को ही विधेयक पारित होने का क्रेडिट जाएगा।

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