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ब्लॉग पर भड़ास निकालना पड़ सकता है भारी

ब्लाग पर मनमर्जी की बकवास लिखने, भड़ास, कुंठाएं प्रकट करने और अपुष्ट आरोप लगाने वाले सावधान। यह मानहानि का अपराध हो सकता है जिसके लिए तीन साल की सजा तथा दो लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में ब्लाग पर राजनीतिक पार्टी के खिलाफ अभियान चलाने वाले युवक को राहत देने से इनकार कर उसके खिलाफ दायर मानहानि की एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केाी बालाकृष्णन और पी सथाशिवम की खंडपीठ ने केरल के युवक की रिट याचिका खारिा करते हुए कहा कि इस बार में कानून अपना काम करगा। कोर्ट ने यह तर्क ठुकरा दिया कि ब्लाग पर लिखे गए शब्द ब्लागर्स समुदाय के लिए ही थे, सार्वजनिक नहीं। इस संबंध में साइबर कानून के विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं कि ब्लाग लिखने वालों को अपनी सीमा में रहना चाहिए। ब्लाग एक सार्वजनिक स्थल है जिस पर लिखी गई हर बात सार्वजनिक होती है। आईटी एक्ट में इसके दुरुपयोग पर रोक है। इस कानून में ब्लागर को ‘इंटरमीडियरी सर्विस सोर्स’ की श्रेणी में रखा गया है जो साइट पर लिखी हर बात के लिए नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर की तरह जिम्मेदार होता है। अभिव्यक्ित की स्वतंत्रता के नाम पर आप किसी की मानहानि नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि ब्लॉग सार्वजनिक स्थल है इसलिए इसमें कही गई कोई भी बात आपराधिक और सिविल मानहानि का कारण बन सकती है। आपराधिक मामले में मानहानिकर्ता को तीन साल की सजा तथा दो लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। युवक ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की और कहा कि उसके खिलाफ एफआईआर रद्द की जाए क्योंकि ब्लाग पर पोस्ट किए गए कमेंट ब्लागर्स समुदाय के लिए थे, सार्वजनिक नहीं।ड्ढr

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