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तीन महीने में नियुक्ित हो : हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने तीन महीने के भीतर राज्य के पांच मेडिकल कालेजों में स्थायी प्राचार्यो की नियुक्ित का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जे बी कोशी और न्यायाधीश रवि रांन की खंडपीठ ने पटना मेडिकल कालेज में रडियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डा. सच्चिदानंद प्रसाद की याचिका पर यह आदेश दिया है। अभी भी राज्य के छह में से पांच मेडिकल कालेज अस्थायी प्राचार्यो के भरोसे चल रहे हैं। सिर्फ नालंदा मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. सी बी चौधरी स्थायी प्राचार्य हैं। बाकी पांचों मेडिकल कालेजों में अस्थायी प्राचार्य हैं।ड्ढr ड्ढr इसमें पटना मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. देवी दयाल गुप्ता, मगध मेडिकल कालेज गया के प्राचार्य डा. मदन प्रसाद सिंह, मुजफ्फपुर के एसकेएमसीएच के प्राचार्य डा. डी के सिन्हा, दरभंगा मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. एस एन सिन्हा और भागलपुर मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. अरुण कुमार सिन्हा शामिल हैं। हालांकि इस दौरान चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण नयी नियुक्ितयों पर रोक है। जसे ही आदर्श आचार संहिता समाप्त होगी नयी नियुक्ित की जाएगी। दूसरी ओर सभी अस्पतालों में अधीक्षकों के भी पद अस्थायी व्यवस्था के तहत ही चलाए जा रहे हैं।ड्ढr ड्ढr कोर्ट की शरण में गए प्रभावित उम्मीदवारड्ढr पटना (का.सं.)। हिन्दुस्तान में एलआईसी सहायक भर्ती मामले में गड़बड़ी की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रभावित उम्मीदवारों ने पटना हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की। प्रमीत कुमार और अन्य की ओर से दायर इस याचिका पर सोमवार या मंगलवार को सुनवाई होगी। उल्लेखनीय है कि हिन्दुस्तान ने शनिवार को ‘रिजल्ट के समय ही बदल गई सूची’ खबर छापी थी। भारतीय जीवन बीमा निगम के पूर्व मध्य क्षेत्र ने सौ उम्मीदवारों को सूची से निकाल कर उनके स्थान पर नए उम्मीदवारों का नाम जोड़ दिया। एलआईसी में सहायकों की भर्ती के लिए 21 सितंबर 2008 को लिखित परीक्षा हुई थी। जिसमें सफल हुए करीब 650 उम्मीदवारों का इंटरव्यू चार मार्च 200से शुरू हुआ और करीब एक महीने चला। अब जब रिाल्ट की बारी आई तो एलआईसी पूर्व मध्य क्षेत्र के मुख्यालय के नोटिस बोर्ड पर 100 उम्मीदवारों को निकालने और नए उम्मीदवारों को शामिल करने की सूचना के साथ नई सूची चिपका दी गई।ं

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