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10 दिसंबर, 2019|4:11|IST

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महंगाई के दौर में भी नहीं रुलाती मिर्ची!

महंगाई के दौर में भी नहीं रुलाती मिर्ची!

महंगाई के दौर में शक्कर कड़वी हो गई है, तेल की धार पतली है, दाल दुर्लभ है मगर नाम का जिक्र आते ही रुला देने वाली मिर्ची का तीखापन अब भी बरकरार है। उसके दाम हमें नहीं रुलाते।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 40 किलोमीटर दूर स्थित विदिशा जिले में लगे मिर्ची बाजार में देश के विभिन्न इलाकों की मिर्ची आई है। यहां आई गुंटूर, तेजा, सी पांच, सिंगल पट्टी, रेशम पट्टी और पटना (शिमला) की मिर्ची सहित मिर्ची की दर्जनभर किस्में हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं और अपने स्वभाव का एहसास करा देती है।

आकार और रंग के साथ अलग तासीर की इन मिर्चियों का अलग-अलग महत्व है। इस बाजार में मिर्ची का दाम 40 से 65 रुपए प्रति किलो तक है जो पिछले सालों की तुलना में 10 रुपए किलो तक कम है।

श्याम लाल साहू के परिजन पिछले 30 सालों से इस बाजार में मिर्ची का कारोबार करते आ रहे हैं। वे बताते हैं कि इस बाजार में आने वाली गुंटूर मिर्ची कम तीखी होने के साथ रंग देने वाली होती है, जबकि तेजा किस्म की मिर्ची अपने नाम के मुताबिक तेज (तीखी) होती है। इसी तरह सी पांच तीखी होने के साथ रंग देने वाली होती है। पटना मिर्ची जिसे शिमला मिर्ची भी कहा जाता है वह कम तीखी होती है।

विदिशा में रामलीला मेला के बाद लगने वाला मिर्ची बाजार मार्च में शुरू होकर मई तक चलता है। इस बाजार में मिर्ची की 30 से अधिक दुकानें लगी है। दुकानों पर लगे ढेर मिर्ची की किस्मों से पल भर में ही परिचित करा देते है। इस बाजार में घुसते ही मिर्ची की गंध नाक में खुजली पैदा कर देती है। एक अनुमान के मुताबिक इस बाजार में 60 दिन में एक करोड़ से अधिक की मिर्ची का कारोबार होता है।

मिर्ची के कारोबारी पन्ना लाल बताते हैं कि इस बाजार में प्रदेश के अनेक हिस्सों से खरीददार आते हैं। इस बार देश के विभिन्न हिस्सों में मिर्ची की पैदावार अच्छी हुई है जिसके चलते भले ही महंगाई आसमान छू रही हो मगर मिर्ची के दाम कम हुए है।

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