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17 नबम्बर, 2019|8:29|IST

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प्रशासन ने माना-आश्रम दोषी, आश्रम ने कहा-भगवान

मनगढ़ में मुफ्त में बँटी मौत के लिए जहाँ प्रशासन ने भक्तिधाम के प्रबंधकों को दोषी ठहराया है वहीं जगदगुरु कृपालु परिषद ने हादसे का दोष भगवान पर ही मढ़ा है। परिषद ही मनगढ़ में स्थापित भक्तिधाम का संचालन करती है। गुरुवार को कृपालु जी महाराज की पत्नी की बरसी पर आयोजित भंडारे में भगदड़ मच जाने के कारण 63 लोगों की मौत हो गई थी तथा 150 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में मनगढ़ चौकी के प्रभारी दयाशंकर तिवारी की तहरीर पर भक्तिधाम के विरुद्ध पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।

उधर मंदिर प्रशासन अपने को निदरेष साबित करने में जुटा है। घटना के लिए असली गुनहगार कौन है और इसकी जिम्मेदारी किस पर थोपी जाए, इसे लेकर गुरुवार की देर रात तक प्रशासनिक अधिकारी विचार-विमर्श करते रहे। प्रशासन पूरी तरह से इसके लिए आयोजक मण्डल को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। उधर जगदगुरु कृपालु परिषद के सेक्रेटरी अमित कुमार का कहना है कि दुर्घटना के लिए आयोजक मण्डल जिम्मेदार नहीं है।

कार्यक्रम की जानकारी 25 फरवरी को ही पुलिस प्रशासन को दे दी गई थी, फिर भी प्रशासन द्वारा गंभीरता नहीं बरती गई। उन्होंने कहा कि 25 हजार लोग कहाँ से आ गए इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। आश्रम के अधिकारी यह भी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने किसी को बुलाया नहीं था। वे नहीं जानते कि आखिर इतने लोग कैसे आ गए। आश्रम यह भी कह रहा है कि जितनी भी मौतें हुई हैं वे सड़क पर हुईं न कि आश्रम परिसर में, इसलिए आश्रम या उसके किसी व्यक्ति का कोई दोष नहीं है।

गुरुवार को मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि संत कृपालु जी महाराज की पत्नी की बरसी पर आश्रम में भण्डारे का आयोजन किया गया था, साथ ही यह घोषणा भी की गई थी कि इसमें प्रसाद के साथ रुपये, बर्तन और कपड़े बाँटे जाएँगे। अब आश्रम प्रबंधन ऐसी किसी घोषणा से इनकार कर रहा है। आश्रम के अस्पताल के प्रवक्ता केपी सिंह ने शुक्रवार को कहा कि इन मौतों के लिए ईश्वर जिम्मेदार हैं।

63 लोगों को आश्रम की लापरवाही ने नहीं, बल्कि वक्त ने मारा है। शुक्र है कि आश्रम के स्वयंसेवकों ने इस हादसे को बड़ा नहीं होने दिया। इससे पहले कृपालु महाराज ने गुरुवार को एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में कहा था-‘मैं इस दुर्घटना को लेकर बहुत दुखी हूँ। उन्होंने हादसे से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि हमेशा आश्रम में कम लोग आते थे, पता नहीं क्यों गुरुवार को ज्यादा भीड़ आश्रम के बाहर सड़क पर एकत्र हो गई थी।’ 

इसके जवाब में प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक मोहित कुमार मिश्र ने कहा कि घटना के लिए पूरी तरह से आयोजक मण्डल जिम्मेदार है। जिले में निषेधाज्ञा लागू होने के बाद भी आयोजक मण्डल द्वारा कानून का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आश्रम प्रशासन को इतनी भारी भीड़ को संभालने के लिए जो इंतजाम करने चाहिए थे, वैसे नहीं किए गए। जिले के अपर पुलिस अधीक्षक सत्यभूषण पाठक ने शुक्रवार को बताया कि भगदड़ मामले में आयोजकों और आश्रम के प्रबंधकों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

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