प्रशासनिक चूक से लीक हुआ पर्चा - प्रशासनिक चूक से लीक हुआ पर्चा DA Image
15 नबम्बर, 2019|12:59|IST

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प्रशासनिक चूक से लीक हुआ पर्चा

संत जयकृष्ण दास उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में इंटर की बजाय हाईस्कूल का पर्चा बांट दिये जाने की जड़ में भारी प्रशासनिक चूक उजागर हुई है। आनन-फानन में जिविनि की तहरीर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार तो कर लिया गया है लेकिन इससे प्रशासनिक लापरवाही को छिपाया नहीं जा सकता। उक्त विद्यालय वित्तविहीन है और पहली बार इसे बोर्ड परीक्षा का केन्द्र बनाया गया है।

नियम के मुताबिक वित्तविहीन विद्यालय को केन्द्र बनाने की दशा में वहां केन्द्र व्यवस्थापक के रूप में सवित्त विद्यालय के किसी अध्यापक को तैनात किया जायेगा। जबकि उस विद्यालय का प्रधानाचार्य सह केन्द्र व्यवस्थापक के रूप में कार्य करेंगे। अन्य बाहरी शिक्षकों की भी डय़ूटी लगायी जायेगी। परीक्षा के दिन सीलबंद पेपर खोलने की भी एक पूरी प्रक्रिया है। इसके तहत केन्द्र व्यवस्थापक, सहायक केन्द्र व्यवस्थापक के साथ ही दो बाहरी कक्ष निरीक्षकों की मौजूदगी में पेपर बंद आलमारी में से निकाला जायेगा। इसके बाद उक्त सबकी मौजूदगी में बाकायदा परीक्षा की तिथि, दिन, प्रश्नपत्र कोड आदि का मिलान किया जायेगा और तब प्रश्नपत्र को लिफाफे से बाहर निकाला जाता है।

संत जयकृष्ण दास उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में इंटर की बजाय हाईस्कूल का पर्चा बांट दिये जाने के मामले में जिविनि की तहरीर पर विद्यालय के सिर्फ प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। सवाल यह है कि क्या इस पूरी लापरवाही के लिए सिर्फ प्रधानाचार्य ही दोषी हैं? यदि नहीं तो बाकी लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? केन्द्र व्यवस्थापक व दो अन्य लोग क्यों इससे अछूते रहे गये, जिनकी मौजूदगी में पेपर का सील खोला गया था।

इस पूरे मामले में जिविनि छोटेलाल व उप जिलाधिकारी सदर सुशील कुमार शर्मा के बयान में भी कही न कहीं अंतर साफ नजर आ रहा है। इस संबंध में जिविनि की मानें तो उक्त विद्यालय का केन्द्र व्यवस्थापक बालचंद्र राम को बनाया गया था। उन्होंने बताया कि प्रधानाचार्य के अलावा केन्द्र व्यवस्थापक व दो अन्य गवाहों के खिलाफ भी उन्होंने कार्रवाई के लिए लिखा है। पुलिस को दी गयी तहरीर में भी इसका जिक्र है।

उधर, उप जिलाधिकारी की मानें तो केन्द्र व्यवस्थापक ने वहां कार्यभार ग्रहण ही नहीं किया था। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब उन्होंने कार्यभार ग्रहण ही नहीं किया तो प्रशासन ने वहां के लिए नयी व्यवस्था क्यों नहीं की थी? पूरे मामले में दोषी चाहें जो भी हो, एक बात तो साफ है कि परीक्षा के पहले दिन प्रशासन की चूक साफ उजागर हुई है।

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