भारत-पाक वार्ता में कोई बिचौलिया मंजूर नहीं : मनमोहन - भारत-पाक संबंधों में कोई बिचौलिया मंजूर नहीं : मनमोहन DA Image
17 नबम्बर, 2019|12:42|IST

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भारत-पाक संबंधों में कोई बिचौलिया मंजूर नहीं : मनमोहन

भारत-पाक संबंधों में कोई बिचौलिया मंजूर नहीं : मनमोहन

भारत-पाक संबंधों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से साफ इंकार करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी दबाव की बात कर विपक्ष देश को गुमराह न करे, क्योंकि वहां के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक बार भी हम पर ऐसा कोई दबाव नहीं डाला है।

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देते हुए मनमोहन ने कहा कि सऊदी अरब के साथ बातचीत में भारत-पाक मुद्दे पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि हमें किसी मध्यस्थ की जरूरत नहीं है। हमारे लिए राष्ट्रहित सबसे ऊपर है।

भारत-पाक संबंधों को लेकर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित कई विपक्षी सदस्यों द्वारा अमेरिका के आगे घुटने टेकने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि मैं सदन को आश्वासन देता हूं कि हम किसी मध्यस्थ को स्वीकार नहीं करेंगे। हम पाकिस्तान से सीधे बात करेंगे।

ओबामा द्वारा जम्मू-कश्मीर मसला हल करने के लिए भारत पर कथित रूप से दबाव डालने के आडवाणी के आरोपों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ओबामा से कई बार बात हुई है और मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत पर दबाव नहीं डाला जा सकता है। उन्होंने हमेशा हमारी स्थिति को समझा।

अमेरिकी दबाव का आरोप लगाने वालों से उन्होंने कहा कि जो संवेदनशील मुद्दे हैं, उन पर गलत जानकारी न दें।

पाकिस्तान के साथ हाल ही में बहाल की गयी उच्चस्तरीय वार्ता की आलोचनाओं को नकारते हुए मनमोहन ने कहा कि पाकिस्तान के प्रति अपनी नीति को लेकर सरकार पूरी तरह सजग है। वार्ता का जरिया बंद नहीं होना चाहिए लेकिन पाकिस्तान को आतंकवाद पर लगाम लगानी चाहिए। किसी सभ्य देश के लिए वार्ता जरूरी है। बात तो करनी होगी।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन दो महाशक्तियों के बीच शीतयुद्ध अपने चरम पर था, तो अमेरिका और सोवियत संघ ने परस्पर संवाद बंद नहीं किया था।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपनी भूमि से आतंकवाद को रोकने के लिए हमें जो आश्वासन दिये थे, वे पूरे नहीं हो रहे हैं।

भारत पर चीन की बुरी नजर को लेकर सदस्यों के आरोपों पर प्रधानमंत्री ने कहा कि चीन हमारा महत्वपूर्ण पडोसी देश है, जिसके साथ हमारे व्यापक संबंध हैं। भारत और चीन के बीच अच्छे संबंध न सिर्फ दोनों देशों के हित में बल्कि एशिया प्रशांत और पूरी दुनिया की शांति और स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

 

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