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17 नबम्बर, 2019|8:01|IST

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आंटी जी और महंगाई

मिसेज़ मेहरा अपने दोनों बच्चों के साथ मॉल के बाहर एकमात्र पेड़ के नीचे खड़ी थीं। मैंने कहा : ‘आंटी जी, आप यहां कैसे?’
बोलीं : ‘हम पिक्चर देखकर आ रहे हैं। ड्राइवर की वेट कर रही हूं।’
मैंने पूछा : ‘कैसी थी फिल्म?’ बताने लगीं : ‘गुड मूवी, बट कई सीन में रोना आ गया।’ मैंने कहा : ‘क्या महंगाई के बारे में थी?’ बोलीं : ‘ओ नो, ऑल अबाउट टेरर्रिज्म।’
मैंने जानना चाहा : ‘और मिस्टर मेहरा?’
उन्होंने बताया : ‘हमेशा की तरह ऑफिस में। वेरी बिजी, आज तो लेट आएंगे। पिछले महीने उन्हें प्रमोशन मिला है। आज क्लब में दोस्तों को पार्टी दे रहे हैं।’

मैंने घड़ी देखी : ‘लेकिन पिक्चर तो एक घंटा पहले खत्म हो गई थी?’ उन्होंने बच्चों की तरफ देखा : ‘मूवी के बाद ये खाए-पिए बिना कहां मानते हैं।’
आंटी जी बोलीं : ‘कितनी महंगाई हो गई है। जो आइसक्रीम कुछ महीने पहले 60 रुपए की थी, अब वह 70 रुपए की हो गई है। बच्चों के साथ फिल्म देखने जाओ तो हजार-बारह सौ कहीं नहीं गए। हर चीज को आग लगी हुई है। अब पेट्रोल की प्राइस बढ़ गई है। गॉड नोस यह मंहगाई कहां जाकर रुकेगी।’

वह मेरे परिवार का हालचाल पूछ ही रही थीं कि उनकी कार आ गई। ड्राइवर ने दरवाजा खोला ही था कि गुब्बारेवाला लड़का आ गया। दोनों बच्चे चहके : ‘ममी, बैलून।’
आंटी जी ने इशारे से पूछा तो लड़का बोला : ‘दस रुपए का एक।’ उन्होंने डांटा : ‘लूट मचा रखी है। दो के पन्द्रह रुपए लेने हैं?’ लड़का फौरन मान गया। दो गुब्बारे लेकर उन्होंने बच्चों को थमा दिए और तीनों कार में जा बैठे।

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