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15 नबम्बर, 2019|1:40|IST

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स्पेन से हारकर भारत की सेमीफाइनल की राह बेहद मुश्किल

स्पेन से हारकर भारत की सेमीफाइनल की राह बेहद मुश्किल

कमजोर डिफेंस, लचर फारवर्ड और पेनल्टी कार्नर पर बारंबार नाकामी के चलते भारत को स्पेन के हाथों 5-2 से शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा जिससे बारहवें विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश की उसकी राह लगभग नामुमकिन हो गई है ।

पहले मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराने वाली भारतीय टीम की यह लगातार दूसरी शर्मनाक हार है। पिछले मैच में आस्ट्रेलिया ने उसे 5-2 से हराया था। पूल बी में आस्ट्रेलिया ने दो धमाकेदार जीत दर्ज की है जबकि इंग्लैंड तीनों मैच जीतकर शीर्ष पर है।

स्पेन ने भी दो मैच जीते और एक हारा है जबकि भारत और पाकिस्तान के खाते में तीन मैचों में एक एक जीत ही गई है। स्पेन के लिये अलबर्ट सेला (19वां मिनट), पोल अमाट (35वां), पाउ कामेडा (41वां और 67वां), राक ओलिवा (43वां) ने गोल दागे जबकि भारत की ओर से संदीप सिंह (38वां), गुरविंदर सिंह चांदी (44वां) ने गोल किये।
   
भारतीय टीम ने शुरूआत बेहद आक्रामक की लेकिन उस लय को कायम नहीं रख सकी। डिफेंस में धनंजय महाडिक ने और फारवर्ड पंक्ति में दीपक ठाकुर तथा प्रभजोत सिंह जैसे अनुभवी खिलाडिम्यों ने बुरी तरह निराश किया। टूर्नामेंट से पहले भारत का ट्रंपकार्ड माने जा रहे संदीप ने निराश किया और वह भारत को मिले छह पेनल्टी कार्नर में से सिर्फ एक को तब्दील कर सके।

स्पेन को 11वें मिनट में पहला पेनल्टी कार्नर मिला जिसे पी श्रीजेश ने बड़ी कुशलता से बचा लिया। पहले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्र्शन करने वाले श्रीजेश को आस्ट्रेलिया के खिलाफ फ्लाप रहे एड्रियन डिसूजा की जगह फिर मौका दिया गया था।

स्पेन ने हालांकि आठ मिनट बाद ही गोल करके भारतीय डिफेंस की कलई खोल दी। अलबर्ट सेला ने बायें फ्लैंक से जुआन लेंज अबेटुआ से क्रास लिया और सर्कल के भीतर अकेले दौड़ते हुए गेंद गोल में डाल दी। स्पेन को 23वें मिनट में एक और पेनल्टी कार्नर मिला जो बेकार गया।
     
इस बीच भारतीयों ने जवाबी हमले करते हुए 24वें मिनट में पहला पेनल्टी कार्नर अर्जित किया। आस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन पेनल्टी कार्नर गंवाने वाले संदीप सिंह एक बार फिर नाकाम रहे। रिबाउंड पर सरदार सिंह का निशाना भी चूका। ठाकुर ने बराबरी का गोल दागने का सबसे आसान मौका गंवा दिया। वह 28वें मिनट में स्पेन के गोल के सामने थे और कोई डिफेंडर पास नजर नहीं आ रहा था लेकिन उन्होंने गेंद पकड़ने में काफी देर कर दी।

भारत के लिये एकमात्र राहत की बात श्रीजेश की कुशल गोलकीपिंग थी जिसने 30वें मिनट में एक और पेनल्टी कार्नर बचाया । लेकिन स्पेन के कप्तान और 2008 में एफआईएच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे अमाट ने 35वें मिनट में गोल करके टीम को 2- 0 से बढत दिला दी।

भारत ने अपना खाता दूसरे हाफ के तीसरे मिनट में खोला जब संदीप की ड्रैग फ्लिक का जादू आखिरकार चला और भारत ने दूसरे पेनल्टी कार्नर को तब्दील किया। इसके बाद हालांकि स्पेन ने तीन मिनट में दो गोल करके कहानी फिर बदल दी। पहले पाल कामेडा ने पेनल्टी कार्नर को गोल में बदला और 43वें मिनट में राक ओलिवा के शाट को श्रीजेश बचा नहीं सके।

चांदी ने 44वें मिनट में पहली बार स्पेनिश डिफेंस को चकमा देकर भारत के लिये दूसरा गोल दागा। इसी मिनट भारत को तीसरा पेनल्टी कार्नर मिला लेकिन संदीप को फिर नाकामी हाथ लगी। स्पेनिश टीम भी 47वें मिनट में पेनल्टी कार्नर को तब्दील नहीं कर सकी।

अगले मिनट भारत को मिले पेनल्टी कार्नर पर संदीप का निशाना फिर चूका और रिबाउंड पर अर्जुन हलप्पा भी सटीक शाट नहीं लगा पाये। भारत को इसके बाद तीन और पेनल्टी कार्नर मिले जो बेकार गए। वहीं स्पेन के लिये कामेडा ने आखिरी हूटर से तीन मिनट शेष रहते गोल करके अच्छी जीत तय कर दी।

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