जूते-चप्पल बता रहे थे त्रसदी के दास्तान - जूते-चप्पल बता रहे थे त्रसदी के दास्तान DA Image
22 नवंबर, 2019|3:13|IST

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जूते-चप्पल बता रहे थे त्रसदी के दास्तान

भक्ति धाम मनगढ़ का टूटा हुआ गेट त्रसदी के मंजर को साफ बयां कर रहा था। महिलाओं के हाथों की टूटी हुई चूड़ियाँ और सैकड़ों चप्पल-जूते खौफनाक मंजर को बयां कर रहे थे। कोई चप्पल देख फफक रहा था तो कोई अन्य सामान। मनगढ़ पुलिस चौकी से महज 50 मीटर दूर वह खूनी गेट था जो तबाही की दास्ताँ लिख गया। चारों तरफ बिखरी महिलाओं की चूड़ियाँ और चप्पल के अवशेष हादसे की दास्ताँ बताने के लिए काफी थे। किसी ने अपना सुहाग गँवाया तो किसी ने अपनी कोख सूनी कर ली।

रामपुर गड़ौरी का मेवालाल अपने नौ साल के बेटे लल्लू के साथ भण्डारे में शामिल होने आया था। भगदड़ हुई और लल्लू का साथ उससे छूट गया। हादसे के बाद एक चप्पल पकड़कर मेवालाल फफक पड़ा। उसे आशंका थी कि यह चप्पल उसके बेटे की होगी। नेवादा बिहारगंज के रामचंद्र का भी यही हाल था। उसकी 14 वर्षीय बेटी रेनू का दुपट्टा ही खून से सना हुआ पड़ा था।

सलोनी के पुरवा गाँव का राम धनी अपनी पत्नी शिव कुमारी से शायद कभी नहीं मिल सकेगा। शिव कुमारी जिंदा भी है या दुनिया से रुखसत कर गई? देर शाम तक उसे यह बताने कोई प्रशासनिक अफसर नहीं पहुँचा। लाठी लिए पुलिस कर्मियों को दरकिनार कर रामधनी मनगढ़ अस्पताल के गेट तक तो जा पहुँचा लेकिन उसे ठोकर देकर भगा दिया गया।

हर शख्स बेबस और लाचार नजर आ रहा था। उनके हालात देखकर लगता था कि कहीं न कहीं गरीबी और मुफलिसी की मार के चलते धाम तक पहुँचे थे। उन्हें शायद यह लालच अब जिन्दगी भर के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन जाएगा।

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