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21 नवंबर, 2019|5:33|IST

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भगदड़ में मृतकों की संख्या 65 हुई, 200 घायल

भगदड़ में मृतकों की संख्या 65 हुई, 200 घायल

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित कपालु महाराज आश्रम में गुरुवार को भंडारे के दौरान आश्रम का गेट ढहने से मची भगदड़ में कम से कम 65 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि 28 अन्य व्यक्ति घायल हो गये। मरने वालों में अधिकतर महिलायें एवं बच्चे हैं। हादसे के समय वहां लगभग दस हजार लोग मौजूद थे।
     
कुण्डा के परगनाधिकारी श्यामा चरण ने बताया कि तहसील के मानगढ़ धाम में संत कपालु महाराज की पत्नी के श्राद्ध के मौके पर आयोजित भंडारे के दौरान अचानक मंदिर का गेट और पंडाल गिर जाने से उसके नीचे दबकर और उसके बाद मची भगदड़ में 37 महिलाओं और 26 बच्चों सहित 65 लोगों की मत्यु हो गयी।

पुलिस महानिरीक्षक (इलाहाबाद रेंज) चन्द्र प्रकाश ने बताया कि भंडारे में लगभग दस हजार श्रद्धालुओं के जुटने के दौरान हुए इस हादसे में कम से कम 28 अन्य घायल भी हुए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घायलों को यहां से लगभग 75 किलोमीटर दूर प्रतापगढ और इलाहाबाद के अस्पतालों में भर्ती किया गया है।

गृह विभाग के सूत्रों ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बताया कि हादसे में अब तक कम से कम 65 लोगों के मरने की सूचना है जिनमें से उनमें 37 बच्चों और 26 महिलाएं है। उन्होंने बताया कि हादसे में 29 व्यक्ति गंभीर रुप से घायल हुए हैं जिन्हें प्रतापगढ़ जिला चिकित्सालय एवं इलाहाबाद के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

इस बीच प्रदेश के मंत्रिमंडलीय सचिव शशांक शेखर सिंह ने बताया कि हादसे के बारे में प्राथमिकी दर्ज करके इलाहाबाद के मंडलायुक्त को 24 घंटे के भीतर सारे मामले की जांच करके अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी। मंत्रिमंडलीय सचिव शेखर सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिल जाने के बाद हताहतों के परिजनो के लिए आर्थिक सहायता के बारे में निर्णय लिया जायेगा।

उन्होने बताया कि जिला प्रशासन ने हादसे की जानकारी होते ही मोके पर पहुंच कर बचाव एवं राहत कार्य शुरू कराया और घायलो को प्रतापगढ और इलाहाबाद के अस्पतालों में भर्ती करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मायावती ने घटना पर दु:ख व्यक्त करते हुए अपने वरिष्ठ मंत्रिमंडलीय सहयोगियो नसीमुद्दीन सिद्दीकी और स्वामी प्रसाद मौर्य को स्थिति की मौके पर जानकारी लेने के लिए प्रतापगढ भेज दिया है, जो उन्हें अपनी रिपोर्ट देंगे।
     
इस बीच संत कपालु महाराज ने कहा है कि हादसा उनके आश्रम में नही हुआ है बल्कि आश्रम के बाहर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा है कि भले ही हादसा उनके आश्रम में न हुआ हो, वे चूंकि समाज सेवा में है और मृतक और घायल होने वाले उनके आश्रम में आ रहे थे, इसलिये आश्रम की तरफ से मृतकों के परिजनों को पचास-पचास हजार रूपये और घायलों को दस-दस हजार रूपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी। उधर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मरने वालों में बहुत से लोगों की गेट के निकट बोरवेल में गिरने से मृत्यु हुई।

अधिकारियों ने बताया कि जिला अधिकारियों को समारोह के आयोजन की पहले से कोई सूचना नहीं दी गयी थी। हताहतों के क्रुद्ध परिजनों ने बताया कि पुलिस उन्हें अपने लोगों के शव तलाशने के लिये वहां जाने की अनुमति नहीं दे रही है।

इस बीच प्रतापगढ के कार्यवाहक जिलाधिकारी अशोक कुमार और कुण्डा के परगनाधिकारी श्यामा चरण ने घटना का ब्यौरा देते हुए बताया कि हादसा उस समय हुआ जब भंडारे में प्रसाद एवं बर्तन आदि का वितरण चल रहा था कि अचानक मंदिर का गेट और पंडाल गिर जाने से अनेक लोग उसके नीचे दब गये, जबकि अनेक उसके बाद हुई भगदड़ में हताहत हुए। भंड़ारे में दस हजार से अधिक की भीड़ जुटी थी, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चों थे।

उधर दिल्ली में लोकसभा में भी सदस्यों ने इस मामले को उठाते हुए सरकार से मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रूपये मुआवजा देने की मांग की गयी। सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सपा नेता मुलायम सिंह ने यह मामला उठाते हुए केन्द्र सरकार से इस मामले का संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई करने की अपील की।
   
इस पर पीठासीन सभापति इंदर सिंह नामधारी ने संसदीय कार्य मंत्री से मामले का संज्ञान लेने को कहा। संसदीय कार्य मंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि सरकार इस मामले का संज्ञान लेती है तथा जो भी संभव होगा किया जाएगा। इसके बाद प्रतापगढ से सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह ने यह मसला उठाते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रूपये मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने घायलों को भी मदद देने का आग्रह किया।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि अक्सर भंडारा, यज्ञ, महायज्ञ में इस तरह की भगदड मच जाती है। अकसर ऐसे कार्यक्रमों की सूचना प्रशासन को नहीं दी जाती। सरकार को नियम बनाना चाहिए कि बिना प्रशासन को सूचित किये ऐसा कोई कार्यक्रम न हो।

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