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10 दिसंबर, 2019|5:03|IST

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धरती में पड़े उर्वरक को जगाएंगा ‘वेम’

जीवाणु के जरिए नई हरित क्रांति को जन्म देने की कवायद तेज हो गई है। यह नया बैक्टीरिया ‘वेम’ जमीन में निष्क्रिय फास्फोरस उर्वरक को घुलनशील बनाकर पौधों तक पहुंचाएगा। तराई के जंगलों में विकसित हुआ यह विशेष जीवाणु किसानों की पसंद बन रहा है।

अक्सर किसान खेतों में डीएपी (डाईअमोनियम फॉस्फेट) का प्रयोग करते हैं। लेकिन इसमें फास्फोरस का काफी हिस्सा ट्राईकैल्शियम फास्फेट में बदल जाता है और पौधों के किसी काम नहीं आता।

यह फास्फोरस जमीन में निष्क्रिय पड़ा रह जाता है। इस समय जमीन में बड़ी मात्र में फास्फोरस बेकार पड़ा हुआ है।

कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. मयंक राय ने बताया कि नेशनल रिसर्च सेंटर के बायो फर्टीलाइजर संस्थान आजमगढ़ के वैज्ञानिकों ने तीन साल पहले एक नया माइक्रो जीवाणु विकसित किया।

जिसे ‘वेम’ नाम दिया गया। वहां से यह जीवाणु सभी जिलों में लाया गया और खेतों में प्रयोग किया जा रहा है।

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