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13 नबम्बर, 2019|12:15|IST

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बेशक बदली है लड़कियों की जिंदगी

बेशक बदली है लड़कियों की जिंदगी

हाल ही में स्टार परिवार की महिला पात्रों से मिलने का अवसर मिला। पूनम जैन ने उनसे जानने की कोशिश की कि छोटे परदे के किरदार रियल लाइफ से कितने अलग हैं?

प्रगति भी है जरूरी-हिना खान

ये रिश्ता क्या कहलाता है धारावाहिक में अक्षरा पात्र ने मुझे लोगों का प्यार भी दिया, प्रसिद्धि भी और पैसा भी, पर असल जिंदगी में मैं वैसी बहू या किरदार के रूप में खुद को देखना नहीं चाहती। जहां तक संस्कार, धैर्य और पारिवारिक मूल्यों को साथ लेकर चलने की बात है तो अक्षरा को मैं असल जिंदगी में अपनाना चाहूंगी,  पर शिक्षा, कॅरियर, निर्णय लेने की स्वतंत्रता, देश और समाज में हो रही प्रगति में मेरी भागेदारी भी मेरे लिए उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। सांस और उड़ान जैसे सही मायने में महिलाओं के सीरियल्स मुझे प्रेरणा देते हैं।

खुद को समझना है जरूरी: उर्वशी उपाध्याय

हमारी देवरानी में मंजूषा नानावटी की भूमिका निभा रही उर्वशी कहती हैं, किसी महिला के लिए अपने सपने पूरे करना और अपनी पहचान बनाने का संघर्ष वाकई मुश्किल होता है। मैं खुद पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटी हूं। गुजरात से मुंबई आने में परिवार की रजामंदी नहीं थी। अपने बलबूते यह कदम उठा रही थी। किसी भी लड़की के लिए अपने परिवार के विरोध में खड़े होना सबसे मुश्किल होता है, पर चूंकि मैं खुद को जानती थी, यहां आने से पहले अभिनय के कई अवॉर्ड जीत चुकी थी, इसलिए अपने सपने पूरे करने के लिए कदम बढ़ा ही दिया। अब परिवार में भी स्वीकार्यता बढ़ गई है।

पार्टनर चुनने का हक मिले: निधि उत्तम

ये रिश्ता क्या कहलाता है, में नंदिनी की भूमिका निभा रही हूं। अपनी उम्र से छोटे लड़के से शादी करना चाहती हूं, जिसके लिए परिवार की राजी नहीं है। निधि उत्तम कहती हैं कि अभी भी बड़ी संख्या में भारत में शादी लड़का-लड़की की नहीं, दो परिवारों की होती है। असल जिंदगी में भी अपना पाटर्नर खुद चुनना चाहूंगी।

हर बेटी को मिलना चाहिए बेबो जैसा प्यार: शिव शक्ति 

मेरी उम्र अभी सत्रह साल है। सबकी लाडली बेबो में मैं सबकी चहेती बेटी का रोल निभाने के बाद अब एक पत्नी की भूमिका भी निभा रही हूं। यदि धारावाहिक से लोग वास्तव में प्रेरणा लेते हैं तो मैं चाहूंगी कि जैसा प्यार धारावाहिक में मुझे बेटी और बहू के रूप में मिल रहा है, सब लोग अपनी बेटियों को भी ऐसा ही प्यार और दुलार दें।

सुंदरता की भी सीमा है: पूजा जोशी

वर्षा के पात्र में पूजा जोशी की सुंदरता और गोरा रंग कई लड़कियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। पूजा कहती हैं, इस इंडस्ट्री में ऐसी लड़कियों की कमी नहीं है, जिन्होंने बहुत सुंदर या गोरी नहीं होते हुए भी टेलेंट के भरोसे अपनी पहचान बनाई है। मेरा मानना है कि इस बात से प्रभावित हुए बिना जिन लड़कियों ने अपनी पहचान बनाने के लिए कदम बढ़ाया है, उन्हें सफलता भी मिली है। 

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