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12 नबम्बर, 2019|2:18|IST

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वर्षा की कमी से हाथियों का पलायन

पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड के जंगली क्षेत्रों में बीते जाड़े के दौरान अपेक्षाकृत कम वर्षा होने से राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में चारे की उपज कम हो गई है और इसके चलते उद्यान में रहने वाले सैकड़ों की तादाद में हाथियों का अन्यत्र पलायन भी हो सकता है। राष्ट्रीय उद्यान के वार्डन एस बी लाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हाथियों के निवास स्थान के आसपास चारे और पानी की कमी महसूस की जा रही है। इसका असर हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों पर पड़ रहा है।

लाल ने बताया कि बीते जाड़े के दौरान कम वर्षा हुई है और इससे स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होने वाले पेड़ पौधों के विकास में भी कमी आई है। इन्हीं पेड़ पौधों को जंगली हाथी तथा अन्य जीव भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

हाथी चूंकि शाकाहारी जीव हैं इसलिए वह पेड़, पौधों और अन्य प्राकृतिक उपज से ही अपना भोजन ग्रहण करता है। वर्षा कम होने के चलते प्राकृतिक उपज में भी कमी आई है जिससे हाथी दूसरे क्षेत्रों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। लाल ने बताया कि हाथियों के झुण्ड को चारे की कमी के चलते तराई की ओर जाते हुए देखा जा रहा है। हालांकि आमतौर पर हाथी मई और जून के महीने में ही ऐसा करते हैं लेकिन वर्षा की कमी के चलते इस बार इनका देशांतरण पहले ही हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पलायन से अन्य समस्यायें भी पनप सकती हैं तथा इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष भी बढ़ सकता है। राज्य के राजाजी राष्ट्रीय उद्यान तथा कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के बीच के क्षेत्र में लैंसडाउन वन प्रभाग का क्षेत्र पड़ता है। इस इलाके में भी चारे पानी की कमी हुई है। लैन्सडाउन प्रभाग के जिला वन अधिकारी नरेन्द्रसिंह ने बताया कि बारिश की अपेक्षाकृत कमी भी प्राकृतिक ही है, लेकिन वन्यजीवों के देशांतरण को रोकने के लिए इस क्षेत्र में चारा पानी तथा वास स्थल भी अच्छी स्थिति में होना चाहिये। इसके लिए आवश्यक इंतजाम जरूरी है। उन्होंने बताया कि आवश्यक चारा पानी उपलब्धता बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाये जाने की जरूरत है।

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