सब दिन होत समान - सब दिन होत समान DA Image
17 नबम्बर, 2019|1:54|IST

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सब दिन होत समान

विवाह-शादियों का अपना एक मौसम होता है। उसका अपना एक महत्व होता है। एक परंपरा चली आ रही है। मेरा एक सुझाव है इसमें कुछ ढील होनी चाहिए। विद्वतजन ध्यान दें कि सीमित समयावधि में शादी होने से लूटमार और मारामारी सी मच जाती है। समय के अनुसार हमें बदल लेना चाहिए। 7 फरवरी से 19 फरवरी तक साया है। इन तिथियों में धर्मशाला, बाजा, हलवाई, पनीर, मावा, दूध, बस-कार सभी को मनमाने दामों में खरीदना वर पक्ष व वधू पक्ष की मजबूरी हो जाती है और खर्च करना ही पड़ता है। जब सभी चीजों का बाजारीकरण हो गया तो पूरे वर्ष भर साया (विवाह) खुला रखें, जिससे मारामारी से बचा जा सकता है। जो काम 15 हजार में हो सकता है उसके लिए 33 हजार नहीं खर्च करने पड़ेंगे और दोनों पक्षों को सुविधा होगी। सभी दिन ईश्वर के होते हैं।
शिव प्रकाश शर्मा, हापुड़

चीन विस्तारवादी है
‘चीन और अमेरिका के रिश्तों की गरमाई’ इसलिए कम हो रही है क्योंकि चीन धोखेबाज और विस्तारवादी है। उसने न केवल ताइवान और तिब्बत को परेशान कर रखा है, बल्कि भारत के बहुत बड़े भूभाग और पाकिस्तान अधिकृत भारत भूमि पर नाजायज रूप से कब्जा कर रखा है। चीन की सेनाएं भारत के अरुणाचल प्रदेश को भी अपना भूभाग बता कर भारत की सेनाओं को अक्सर डराती-धमकाती रहती हैं। सच यह है कि अमेरिका और भारत की शांतिपूर्ण अपीलों की जरूरत विस्तारवादी चीन उस समय महसूस करेगा जिस समय इन दोनों देशों की सरकारें चीन निर्मित वस्तुओं को अपने-अपने बाजारों से हटाने का साहस दिखाएं।
डॉ. जे. डी. जैन, केन्द्रीय विहार, नोएडा

व्रत पर सब्सिडी
फल और दूध की ऊंची कीमतों के कारण लोगों ने व्रत रखना ही बंद कर दिया है। सरकार को चाहिए कि व्रतयोगियों के लिए सस्ते फल व दूध उपलब्ध कराए ताकि व्रतरूपी प्राचीन भक्तिमय परंपरा को निभाया जा सके।
मीना सतीश सोलंकी, यमुना विहार, दिल्ली

एक समान शिक्षा
केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा पूरे देश में शिक्षा के पाठय़क्रम को एक करने की पहल सराहनीय है। सिब्बल के इस प्रयास से कुछ राज्यों के शिक्षा मंत्रियों व वरिष्ठ प्रोफेसरों को परेशानी हो सकती है, लेकिन विद्यार्थियों को इससे भविष्य में सरकारी व निजी क्षेत्र की नौकरियों में अच्छे अवसर प्रदान होंगे। भले ही विद्यार्थी अव्वल रहें लेकिन किसी राज्य की छवि खराब होने का प्रभाव भी छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। सभी राज्यों को एक समान शिक्षा का पुरजोर समर्थन करना चाहिए।
दिनेश गुप्त, कृष्णगंज, पिलखुवा

चिराग तले अंधेरा
आज का हमारा शिक्षित समाज अप्रासंगिक होता जा रहा है क्योंकि जीवन के हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार के लिए आज शिक्षित समाज अपेक्षाकृत अधिक जिम्मेवार है। आज सबसे अधिक नशे की गिरफ्त में, दहेज प्रताड़ना में, कन्या भ्रूण हत्या में, पारिवारिक बिखराव में, डिग्रियों की खरीद-फरोख्त में, धन लोलुपता में शिक्षित समाज अवश्य सम्मिलित है और सबसे खतरनाक बात यह है कि इस समाज के पास हर बुराई को अच्छाई जैसा दिखा देने का तौर-तरीका भी है। यदि अनपढ़ किसी बुराई का शिकार है तो वह अनजाने में है जबकि पढ़ा लिखा समाज जानबूझकर भी भ्रष्ट आचरण अख्तियार करने लगे तो निश्चित रूप से यह राष्ट्र के अस्तित्व पर खतरा है।
नवल किशोर सिंह, लक्ष्मी विहार, बुराड़ी, दिल्ली

कीमत का अंधेर
समाचार पत्र से मालूम हुआ कि सब्जियां फलमंडी में थोक भाव में बहुत सस्ती मिलती हैं लेकिन खुदरा व्यापारी उन्हें 6 या 7 गुना अधिक कीमत पर बेचते हैं। मंडी में आलू तीन रुपए प्रति किलो मिलता है और खुदरा व्यापारी 10 से 12 रुपऐ प्रति किलो बेचता है। मेरा दूध वाला तो 26 जनवरी को 22 रुपए लीटर वाले दूध को 25 में बेच रहा था। कहता था इसी भाव में खरीदा है। सबसे आश्चर्यजनक कथन मुख्यमंत्री महोदया का है कि इन सब्जी विक्रेताओं की संख्या को देखते हुए उन्हें नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।
यू. सी. पाण्डेय, शिवशक्ति, द्वारका 10, नई दिल्ली

प्रतिभाओं की राष्ट्रीय सफाई
ममता बनर्जी की राजनीतिक प्रयोगशाला में क्या पकता है, इसकी झलक इस बार के रेल बजट में बखूबी देखने को मिली है। जिस क्षेत्रीय भाषा को हथियार बनाकर ममता बनर्जी ने बिहार और उत्तर प्रदेश के होनहारों का भविष्य ‘निर्ममता’ पूर्वक मीठी छुरी से हलाल किया है, वह राज व बाल ठाकरे से भी ज्यादा खतरनाक कहा जाएगा।  रेलमंत्री ने क्षेत्रीय भाषा को इजाजत देने के साथ ही रेलवे के सभी जोनों की परीक्षाएं एक ही दिन में कराने की घोषणा कर दी है। अब बिहार और यूपी के छात्र जो मुख्यत: हिंदी माध्यम परीक्षार्थी होते हैं, लगभग सभी जोनों में अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन अब उनसे यह अधिकार छीन लिया गया।
निशिकान्त, गोरेयाकोठी, सीवान।

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