सड़कों के बीच सीवर के मैनहाल बने हादसों का सबब - सड़कों के बीच उठे सीवर के मैनहाल बने हादसों का सबब DA Image
22 नवंबर, 2019|3:50|IST

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सड़कों के बीच उठे सीवर के मैनहाल बने हादसों का सबब

सीवर लाइन के मैनहालों ने शहर की सड़कों पर राहगीरों का सफर जोखिम भरा कर दिया है। मैनहाल कहीं सड़क के बीच में ठोकर बनकर दुर्घटनाओं को अंजाम दे रहें हैं तो कहीं  गड्ढे के रूप में राहगीरों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। समूचे शहर में किसी एक सड़क की ऐसी दशा नहीं है। काफी सड़कों की यह स्थिति नगर निगम प्रशासन की लापरवाही की गाथा गा रही है। हुडा के सेक्टरों में भी बेतुकी ढंग से डाली गई सीवर लाइन परेशानी का सबब बनी हुई है। आए दिन चोटिल हो रहे लोग तो सावधान हो गए हैं। अनजान की परेशानी कम करने को कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।


 नीलम-ओल्ड रेलवे स्टेशन की सड़क हाल में बनाई गई है। नीलम से रेलवे स्टेशन की तरफ जाते वक्त अनेक मैनहाल सड़क के बीच हैं। कहीं हाल का ढक्कन सड़क से ऊपर उठा है तो कहीं नीचे है। होली के दिन एक बुजुर्ग यहां टकराकर गिर गए। जिनको बादशाह खान अस्पताल भेजा गया। सेक्टर-18 में सीवर के खुले मैनहाल में गिरकर पिछले वर्ष एक बिजली कर्मी की मौत हो गई थी। यह तो बानगी है। आए दिन चोटिल हो रहे लोगों का कोई आंकड़ा किसी विभाग में दर्ज नहीं है। स्थानीय निवासी इसके गवाह हैं। खासतौर से रोड के साथ जिनकी दुकान हैं। या फिर कोई दफ्तर चला रहा है। बहरहाल, विकास के नाम पर शहर में सड़कें बना दी जाती हैं। 1960 में डली सीवर लाइन को दुरुस्त करने की बाबत कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं। नतीजतन सड़कों की हालत ‘कुबड़े’ जैसी हो गई। शहर की पुरानी सड़कों की ही यह दशा नहीं है। सेक्टर-12 जाने वाली सड़क पर भी ऐसी स्थिति बनी हुई है।

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सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी के नियमों पर नजर

-आबादी क्षेत्र में सड़क का लेवल मकान के लेवल से नीचे होना चाहिए
-नगर निगम व हुडा को अपने क्षेत्र में सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी के नियमों पर करना होता है
-जिस सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही होती है। वहां निर्माण सामग्री की परत मोटी रखी जाती है
-पानी निकासी के लिए बने नाले की तरफ सड़क का झुकाव होना चाहिए। ताकि एकत्रित होने की बजाय पानी आसानी से नाले में चला जाए
-मजबूती के लिए पुरानी परत को खुदरा करना लाजमी होता है
-लेवल जांचने के लिए सरकारी विभाग का इंजीनियर मौका मुआयना करता है
-निर्माण सामग्री की गुणवत्ता परखने के लिए कोर कटिंग की जाती है

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नगर निगम के एसई डीसी साहू: वित्तीय स्थिति ठीक न होने की वजह से कई जगह काम रुके हुए थे। सीवर के मैनहाल को उठाना इनमें से एक है। सड़क बनने से पहले सीवर का हाल उठाया जाता है। फिर उसके समतल रोड पर रोड़ी चढ़ा दी जाती है। जहां दिक्कत है। जांच करवाकर। उसे ठीक कर दिया जाएगा।


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सीवर लाइन की मियाद खत्म

निगम के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो शहर में सन 1960 में 638 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन डाली गई। आरसीसी की पाइप इसमें इस्तेमाल की गई। 30 वर्ष तक के लिए इसको डाला गया था। जो 1990 में पूरी हो गई। इसका समय पूरा हुए 20 वर्ष होने जा रहे हैं।

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शहर की जनसंख्या पर एक नजर

      वर्ष                       जनसंख्या
1961 56000
1971                      1.22 लाख
1981 3.27 लाख
1991                       6. 13 लाख
2001                      10.53 लाख
2009                      18 लाख
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जनता बोले
एनआईटी-4 के रामसिंह: सड़कों के बीच उभर रहे सीवर के मैनहाल से मैं भी कई बार परेशान हो जाता हूं। अनजान सड़क पर चलना बेहद मुश्किल हो जाता है। खासतौर से रात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
एनआईटी तीन के अमर बजाज: कई बार समाचार आए हैं कि मैनहाल में गिरकर व्यक्ति की मौत हो गई। ऐसे मामलों में निगम के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। टाटा सफाई भी निगम की लापरवाही से एक गड्ढे में पूरी डूब चुकी है।

भगत सिंह कालोनी के सतनाम सिंह: सड़क में कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए। गाड़ी चलाते वक्त वाहन चालक की नजर ज्यादातर सामने किसी वाहन, राहगीर, पशु आदि पर होती है। सीवर के ढक्कन उनकी कल्पना से परे होते हैं।

एसजीएम नगर के शैलेश जोहरी: एक तो शहर की सड़कें पहले ही इतनी टूटी हुई हैं। वहां से निकलना दूभर हो जाता है। जहां सड़कें ठीक हैं। वहां सीवर के ढक्कन परेशानी का सबब बने हुए हैं। दुपहिया चालक के लिए ज्यादा घातक है।
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पूर्व ठेकेदार सुरेश गोयल: सड़क के बीच सीवर के मैनहाल की दशा के लिए नगर निगम जिम्मेदार है। इनको ठीक रखना निगम की ड्यूटी बनती है। ठेकेदार तय नियमों के मुताबिक सड़क बनाता है। जिसमें मैनहालों का रखरखाव करना निगम के जिम्मे है।

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