तमिलनाडु में बिहारी छात्रों पर कहर जारी, दो की मौत - तमिलनाडु में बिहारी छात्रों पर कहर जारी, दो की मौत DA Image
12 नबम्बर, 2019|1:54|IST

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तमिलनाडु में बिहारी छात्रों पर कहर जारी, दो की मौत

वेल्स विवि, चेन्नई में बिहारी छात्रों पर हुए जुल्म के कुछ ही दिन गुजरे थे कि  अन्नामलाई विवि में पढ़ रहे बिहारी समेत उत्तर भारतीय छात्रों पर स्थानीय पुलिस का कहर टूट पड़ा। वडलुर जिले के चिदंबरम में हुई इस घटना में दो बिहारी छात्रों समेत चार की मौत हो गई। मृतकों में दो छात्र झारखंड के हैं। मरने वाले बिहार के छात्रों में इस विवि के इंजीनियरिंग का छात्र आशीष रंजन व सरफराज का नाम शामिल है। आशीष लोहरा, हरनौत,निवासी सुमिन्द्र सिंह का बेटा है जबकि सरफराज पटना के समनपुरा मुहल्ला निवासी ओर पटना हाइकोर्ट में एपीपी पद पर तैनात मतलूब रब का बड़ा पुत्र है। इसके अलावा झारखंड का निवासी सुमीत व गौतम की भी इस हादसे में मौत हो गई। डीजीपी नीलमणि के निर्देश पर बिहार पुलिस के आलाधिकारी घटना के बाद से तमिलनाडू पुलिस के अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। मंगलवार की रात या बुधवार की सुबह तक दोनों छात्रों की लाश पटना लाए जाने के आसार हैं।


आईजी, मुख्यालय राजेश रंजन ने  घटना के बारे में बताया कि तमिलनाडु पुलिस से बिहार पुलिस को मिली औपचारिक सूचना के अनुसार  कि रविवार को मोटरसाइकिल से जा रहे इंजीनियरिंग के छात्र गौतम कुमार एक लैंप पोस्ट से टकराकर सड़क पर गिर पड़ा। इसी बीच पीछे से आ रही एक लॉरी के धक्के से गौतम बुरी तरह घायल हो गया। हालांकि पुलिस ने उसे बेहतर इलाज के लिए पुलचेरी स्थित जीपीका के प्रख्यात अस्पताल में दाखिल कराया पर इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गई। गौतम के मौत की खबर जब उसके संस्थान के छात्रों को मिली तो सोमवार को  बिहार और झारखंड के सैकड़ों छात्र इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए सड़को पर आ गए।। आंदोलन कर रहे छात्रों का आरोप था कि  उसे विवि परिसर में स्थित अस्पताल में भर्ती किया गया। एक छात्र ने ‘हिन्दुस्तान’ को फोन पर बताया कि हालांकि बिहारी व उत्तर भारतीय छात्र गौतम को बड़े अस्पताल में ले जाने की गुहार लगा रहे थे। पर छात्रों की गुहार को किसी ने नहीं सुनी। नतीजतन गौतम की मौत हो गई। और उसके बाद बिहारी व उत्तर भारतीय छात्र बेकाबू हो गए। इन छात्रों ने विवि के आला अधिकारियों के बंगले को घेर लिया और नारेबाजी करने लगे। उसके बाद बौखलाई तमिलनाडु पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्ज करने के बाद उन्हें खदेड़ना शुरू कर दिया। छात्र नजदीक  के ही दलदल भरे नाले में गिर पड़े जिससे आशीष, सरफराज व सुमीत की मौत हो गई। इधर स्थानीय पुलिस की बर्बरता से वहां के बिहारी समेत उत्तरी भारतीय छात्रों में रोष व्याप्त है। हालत यह है कि छात्र पुलिस व दक्षिण भारतीय छात्रों के भय से  हॉस्टल में दुबके हुए हैं। बावजूद पीड़ित छात्रों का फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। दूसरी तरफ अन्नामलाई विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज को बंद कर दिया गया है। छात्रों से हॉस्टलों को खाली करके घर जाने के लिए कहा गया है।

सरफराज के वकील पिता को वडलुर के एसएसपी ने दी दुखद सूचना
विनायक विजेता
मंगलवार को सुबह सात बजे का समय। पटना हाईकोर्ट में वकालत करने वाले मो. मतलूब रब समनपुरा स्थित गरीब मंजिल नामक अपने आवास में सोकर उठे ही थे कि उनके मोबाइल की घंटी बजने लगी। मोबाइल पर अननोन नंबर देखते ही उनका दिल धड़का। फोन ऑन करते ही उधर से बताया गया कि वे वडलुर के एसएसपी हैं। यह सुनते ही मो. मतलूब परेशान हो गये। बेटा सरफराज वहां के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता है। उधर से एसएसपी ने उन्हें तुरत वडलुर पहुंचने को कहा। मो. मतलूब कुछ और समझ पाते तभी उधर से कहा गया कि पुलिस को सरफराज की लाश मिली है। इसके बाद फोन कट गया। इसके बाद तो मो. मतलूब के घर में कोहराम मच गया। उनकी पत्नी बेहोश होने लगी। अपनी भावनाओं पर काबू पाते हुए सरफराज के पिता ने पुन: उस नंबर पर कॉल किया तब उन्हें बताया गया कि इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों द्वारा एक छात्र की मौत के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान मची भगदड़ से बचने के लिए सरफराज सहित कई छात्र एक नाले में कूद गए जिसके कारण सरफराज और दो अन्य छात्रों की नाले में ही डूबकर मौत हो गई। इस खबर ने मो. मतलूब को तोड़कर रख दिया। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। रोने-पीटने की आवाज सुनकर आसपड़ोस के लोग भी सरफराज के घर में जुट गए। बताया जाता है कि सरफराज बीते 28 नवम्बर को बकरीद में पटना आया था। उसने यह त्योहार अपने माता-पिता और छोटे भाई शहबाज उर्फ प्रिंस के साथ ही मनाया था। सरफराज को दो वर्ष पूर्व उसके पिता ने बड़े अरमानों के साथ अन्नामलाई भेजा था जहां वह पांच वर्षो का मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री कोर्स कर रहा था। मूल रूप से पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर थाना अंतर्गत विशुनपुरवा गांव निवासी मतलूब रब का राजधानी के समनपुरा में पैतृक मकान है। सरफराज के दादा भी अधीक्षण अभियंता के पद से रिटायर्ड हैं। सरफराज के चाचा एम एस हबीबुल्ला ने बताया कि उनके फुफेरे भाई अहमद हुसैन चेन्नई में सेंट्रल कस्टम एंड एक्साइज विभाग में आयुक्त हैं जो वहां की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। बेटे की मौत की खबर के बाद सरफराज के पिता मंगलवार को दोपहर बेटे की लाश लाने चेन्नई रवाना हो गए जबकि मां शहनाज परवीन अपने छोटे बेटे के साथ बड़े बेटे के अंतिम क्रियाकर्म की तैयारी के लिए अपने गांव रवाना हो गई। मंगलवार को सरफराज के घर पर जड़े दो ताले मानो यह संकेत दे रहे थे कि सरफराज के माता-पिता के अरमानों पर काल के क्रूर चक्र ने ताला जड़ दिया है।


अन्नामलाई इंजीनियरिंग कॉलेज की घटना में मरनेवालों में एक नालंदा के हरनौत का
 पुलिस पिटाई के डर से भागने के दौरान नहर में गिरने से हुई मौत

 

आशुतोष कुमार आर्य/ बिहारशरीफ
तमिलनाडु के अन्नामलाई इंजीनियरिंग कॉलेज , चितांबरम् की घटना में मरनेवाले छात्रों में एक नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र के लोहरा गांव का रहने वाला था। बेटे की मौत की खबर सुन मृतक आशीष रंजन कुमार के पिता व लोहरा के पूर्व मुखिया सुमिन्द्र सिंह तथा मामा उदय सिंह चितांबरम् पहुंच चुके हैं।
आशीष के रूममेट श्री निवासन ने बताया कि मरनेवाले अन्य दो छात्रों के नाम गौतम व सरफराज हैं। अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के डीन ने भी तीन छात्रों की मौत की पुष्टि की है। श्री निवासन ने मनाने के लिए हॅास्टल के पास स्थित होटल जा रहा था। इसी दरम्यान वह सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। कागलुर जेनरल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गयी। गौतम के सहपाठियों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगा यूनिवर्सिटी कैम्पस स्थित कुलपति के आवास के समीप जमकर हंगामा मचाया तथा तोड़फोड़ भी की। छात्रों के उग्र रूप को देखते हुए पुलिस को बुलानी पड़ी। कुलपति के आवास पर से हटाने के उद्देश्य से पुलिस ने छात्रों को खदेड़ा। पुलिसिया पिटाई के डर से भाग रहे कुछ छात्र कैनाल की दलदल में जा गिरे। फलत: दो छात्रों की मौत हो गयी। काफी खोजबीन के बाद सोमवार के अपराह्न में आशीष रंजन व सरफराज की लाशें मिलीं। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की सूचना के बाद आशीष रंजन कुमार के पिता व मामा चितांबरम् पहुंच गये हैं।
घटना के बाद लोहरा गांव समेत बिहारशरीफ स्थित आशीष के अस्थायी डेरे में मातमी सन्नाटा छाया हुआ है। मां व चचेरी बहन बार-बार बेहोश हो रही हैं। आशीष का साथी श्री निवासन ने यह भी बताया कि पुलिस के खदेड़ने के पूर्व छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट भी हुई थी। श्रीनिवासन के अनुसार अब भी 14 हिन्दी भाषी छात्रों के लापता होने की सूचना है।

आशीष की आईएएस बनाने की थी तमन्ना
अपने बैच में टॉपर था आशीष
बेटों की पढ़ाई की खातिर गिरवी रखी जमीन


आशुतोष/दिलीप
बिहारशरीफ। सिविल सर्विसेज में टॉप रैंक पाने में इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच की एक कड़ी होती है। इंजीनियरिंग के छात्रों को सिविल सर्विसेज पास करना काफी आसान होता है। इसी सोच के तहत हरनौत की लोहरा पंचायत के पूर्व मुखिया सुमिन्द्र सिंह ने अपने दोनों बेटों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के लिए राज्य से बाहर भेजा था। वे बड़े बेटे आशीष रंज़न कुमार को डीएम तथा छोटे बेटे शशि रंजन कुमार को एसपी बनाना चाहते थे। बेटों की पढ़ाई की खातिर उन्होंने पैतृक जमीन को भी गिरवी रख दी। पिता सुमिन्द्र सिंह बताते हैं कि मुखियागिरी के दरम्यान जब भी वे काम के सिलसिले में डीएम व एसपी के पास जाते थे तो उनमें वे अपने बेटों के प्रतिबिंब को देखते और उसी वक्त उन्होंने बेटों को डीएम व एसपी बनाने की ठानी थी। इसी सोच के तहत श्री सिंह ने बड़े बेटे आशीष को कम्प्यूटर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अन्नामलाई यूनिवर्सिटी तथा छोटे बेटे शशि को सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी भेजा था। पिता की बातों को संजीदगी से लेते हुए आशीष काफी मेहनत कर पापा के सपनों को पूरा करने की दिशा में मेहनत कर रहा था। आशीष का सहपाठी श्रीनिवासन बताता है कि उसका दोस्त अपने बैच का टॉपर था। शिक्षक भी उससे काफी खुश रहते थे। सभी साथियों का वह दुलारा था।

उषा की बिखर गयी किरण
लोहरा में छाया है मातमी सन्नाटा
मुकेश कुमार लोहरा (हरनौत)
बुढ़ापे का सहारा बनने के पूर्व ही आशीष की हुई मौत ने उषा देवी की आशा की किरण को ही बिखेर दिया। बेटे की मौत की खबर से उषा देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं। वहीं बड़े चाचा की तीनों बेटियां सोनी, जूली व अर्चना की चीत्कार से बिहारशरीफ के गढ़पर मोहल्ले में स्थित डेरे के पास सारा माहौल गमगीन बना हुआ है। लोहरा में उनके छोटे चाचा अजय सिंह को यह खबर मिली तो वे सन्न रह गये। ‘केकरा रखिया बांधवई ए भइया।’ कहते हुए आशीष की चचेरी बहनों कुछ देर के लिए होश में आतीं फिर बेहोश हो जातीं। खबर सुनने के बाद से ही मां उषा देवी बेसुध पड़ी हुई हैं। ‘हमर कलेजा के टुकड़ा के ला द। एक बार उनकर चेहरा दिखा द। आदि कहती हुई उषा देवी बार-बार बेहोश हो रही थीं।

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