इल्म व अदब परवान चढी़ खानकाह और दायरा में - इल्म व अदब परवान चढी़ खानकाह और दायरा में DA Image
11 दिसंबर, 2019|9:02|IST

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इल्म व अदब परवान चढी़ खानकाह और दायरा में

सूफियाना व मजहबी तालीम से इंसानियत का पैगाम बुलंद करने वाले सूफियों के रहने का स्थान खानकाह व दायरा के लिए उत्तर प्रदेश का इलाहाबाद जिला मशहूर रहा है और खास बात यह है कि इनमें मजहबी तालीम के साथ ही इल्म, अदब व शायरी भी परवान चढी़।

इलाहाबाद में 12 दायरों का जिक्र मिलता है जिनमें से कई अब मौजूद नहीं रहे, जबकि सबसे प्राचीन खानकाहें व दायरे आज भी मौजूद हैं। नगर की सबसे प्राचीन खानकाह व दायरा मशहूर बुजुर्ग हजरत शेख मुहिब उल्लाह इलाहाबादी दादा मियां [996-1057 हिजरी] का है। मुगल बादशाह शाहजहां के दौर के दादा मियां की मजार कीडगंज नई बस्ती स्थित पीरजादों की बाग में है।

बहादुरगंज क्षेत्र स्थित दायरे में मुगलिया तर्ज की शाही मस्जिद तथा खानकाह है। बादशाह शाहजहां व शहजादा दारा शिकोह शेख से खासे प्रभावित थे। मजहब व तसव्वुक पर लिखी उनकी दर्जनों पुस्तकें आज भी देश के विभिन्न पुस्तकालयों में सुरक्षित हैं। मजहबी, अदबी, साहित्यिक व राष्ट्रवादी आन्दोलन का केन्द्र खानकाह व दायरा शाह अजमल की स्थापना हजरत शेख मोहम्मद अफजल इलाहाबादी [1038-1124 हिजरी] ने की।

यह खानकाह उन्हीं के सज्जादानशील हजरत सैय्यद शाह मोहम्मद अजमल इलाहाबादी के नाम से मशहूर हुई। इस दायरे के नामी बुजुर्गों में मौलाना सैय्यद मोहम्मद फाखिर, मौलाना सैय्यद शाहिद फाखरी आदि थे। दायरे की मस्जिद, रौजे व खानकाह आज भी सुरक्षित हैं।

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