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बल्ले-बल्ले, देखें सिनेमा

मंदी ने शहर के मनोरांन उद्योग को भी अपनी चपेट में ले लिया है। हालत यह है कि फिलहाल राजधानी के किसी भी सिनेमा हॉल के सभी सीटें क्षमता के अनुसार फुल नहीं हो रही हैं। नतीजतन इससे निपटने के लिए हॉल मालिकों ने सिनेमा टिकट की दर घटा दी है। जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि तक चले लोकसभा चुनाव के चलते दर्शकों ने हॉल का रुख नहीं किया। यही नहीं दक्षिण अफ्रीका में चल रहे आईपीएल टी-20 मैच की वजह से भी शहरवासी सिनेमा देखने से कन्नी काट रहे हैं। इसके अलावा मार्च व अप्रैल माह में आयोजित मैट्रिक व इंटर की परीक्षाओं ने भी युवा वर्ग को हॉल जाने से रोक दिया। इन सभी वजहों से परशान हॉल मालिकों ने टिकट दर कम कर दी। शहर के आठ सिनेमा हॉल में मोना के अलावा कई हॉल में दर कम कर दी गई है।ड्ढr ड्ढr वहीं कई हॉल में सी श्रेणी की फिल्म कम दर पर दिखाई जा रही है। अब स्थिति यह उत्पन्न हो गई है कि मालिकों के लिए हॉल चलाना दूभर हो गया है। कई शहरों में घाटा के चलते कई सिनेमा हॉल पहले ही बंद हो हो चुके हैं। रिोंट सिनेमा हॉल के सुमन ने बताया कि अपने को बनाए रखने के लिए पहली बार इस हॉल में भोजपुरी फिल्म दीवाना लगा है। वहीं मुंबई में प्रोडय़ूसर्स व मल्टीप्लेक्स ऑनर के बीच विवाद ने भी दीप में घी का काम किया है। प्रोडय़ूसर्स की हड़ताल की वजह से पिछले दो माह से कोई भी नई फिल्म रिलीज नहीं हुई है। अशोक सिनेमा हॉल के एसबीएन सिंह के अनुसार आईपीएल व चुनाव होने के बावजूद भी अगर नई फिल्में रिलीज होतीं तो दर्शकों की भीड़ रहती। दरअसल हड़ताल ने ही धंधा चौपट कर दिया है। उनका कहना है जून तक हड़ताल रहने की उम्मीद है। मोना हॉल के अजय ने बताया कि दर्शकों को हॉल की ओर लाने के लिए टिकट दर घटाने के अलावा कोई चारा नहीं था।

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