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सहयोगी भी निभाएं गठबंधन धर्म:सोनिया

ांग्रेस और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यूपीए के घटकों और सहयोगी दलों को गठबंधन की संस्कृति के नाम पर संयम और अनुशासन बरतने की नसीहत दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षो में कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने के समय गठबंधन धर्म की लक्ष्मण रेखा का पूरा ध्यान रखा है। बुधवार को यहां चौदहवीं लोकसभा के अंतिम सत्र के समापन से एक दिन पहले कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में अगले आम चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति का खुलासा करते हुए श्रीमती गांधी ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर चुनावी तालमेल के बावजूद कांग्रेस राष्ट्रीय मुद्दों और राष्ट्रीय सोच के आधार पर ही जनादेश मांगेगी। उनके अनुसार कांग्रेस ही सही मायने में इकलौती राष्ट्रीय पार्टी है जो पूरे देश में सक्रिय है तथा क्षेत्रीय और स्थानीय भावनाओं को समझती है। कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र में पांच वर्ष तक साझा सरकार चलाने के लिए प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी तथा यूपीए के सभी सहयोगी दलों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि इस बार भी पार्टी कुछ राज्यों में समान विचारधारा वाले दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करेगी। उन्होंने पार्टी के नेताओं से गुटबाजी और आपसी खींचतान भुलाकर चुनाव मैदान में उतरने का आह्वान करते हुए कहा कि देश में कांग्रेस के प्रति समर्थन और सद्भाव का माहैल है। यह हम पर निर्भर है कि हम इसे चुनावी फायदे में कैसे बदलते हैं। पार्टी में गुटबाजी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार हम खुद ही अपने सबसे बड़े शत्रु साबित हुए हैं। पिछले पांच वर्षो में यूपीए के सभी न्यूनतम साझा कार्यक्रमों का पूरा करने का दावा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी यूपीए सरकार की उपलब्धियों, आम आदमी के हितों की रक्षा, समावेशी आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने तथा प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि को आधार बनाकर जनता से नया जनादेश मांगेगी। समाज को बांटने तथा सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली सांप्रदायिक और विघटनकारी ताकतों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखने के लिए भी वोट मांगे जाएंगे। भाजपा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि वह अब तक पिछली हार को भुला नहीं पाई है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्ष हमारे लिए जहां बहुत ही संतोषजनक रहे, वहीं हमें कई चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा। मुंबई जैसे शहरों में आतंकी हमले हुए, सुनामी जैसी कई प्राकृतिक आपदाओं का देश को सामना करना पड़ा।ं

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