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ममता दीदी से रेलयात्रियों की फरियाद

ममता दीदी से रेलयात्रियों की फरियाद

139+लेटलतीफी
मिस्टर रेल यात्री रेलवे की पूछताछ सेवा 139 से परेशान हैं। घर से फोन मिला-मिलाकर उनका माथा खराब। फोन नहीं उठता। अगर कभी उठा तो बताया अमुक गाड़ी आधे घंटे लेट। सामान लाद दौड़ते-भागते मिस्टर रेल यात्राी स्टेशन पहुंचे। पता चला-गाड़ी छह घंटे लेट या समय से छूट गई या आगमन की सूचना नहीं। पूछताछ काउंटर पर बैठे गुस्से से लाल कर्मचारी ने कुछ बताया। बोर्ड ने कुछ दर्शाया। किनारे लगे टीवी पर कुछ और कहानी बकी जा रही। मिस्टर रेल यात्री हैरान। क्या करें? कहां जाएं? बस दुआ करते हैं काश! यह सेवा सुधर जाए।

बेडरोल+सफाई
मिस्टर रेल यात्री जब भी सफर करते अपनी चादर-कंबल लेकर चलते, क्योंकि ट्रेन में मिलने वाले कंबल व चादर देखकर मन खीझता है। उन्हें अक्सर इस्तेमाल की हुईं चादरें थमा दी जातीं। एसी में गंदगी की बास सफर दूभर कर देती। कॉकरोच पूरी रात मिस्टर रेल यात्री से पहरेदारी कराते। एसी में सीट आरक्षित लेकिन मच्छर चैन की नींद नहीं लेने देते। स्वाइन फ्लू और डेंगू के इस भयावह दौर में, बतौर डॉक्टर ट्रेनों के एसी कोच संक्रमण के सबसे खतरनाक इलाके बन गए हैं। मिस्टर रेल यात्री धन भी ज्यादा देते हैं और खतरों से त्रस्त भी रहते हैं।

यात्रा से पहले दुआ
मिस्टर रेल यात्री परिवार के साथ व अकेले सफर पर निकलने से पहले दुआ करते। सुरक्षित यात्रा की कामना करते। अखबारों में यात्रा के दौरान होने वाली घटनाएं पढ़ते। ट्रेन से यात्री को फेंका। सामान लूटा। लड़कियों-महिलाओं से छेड़खानी। विरोध करने वाले युवक को मारा. आदि-आदि। कई घटनाओं में सुरक्षा में तैनात जवान खुद शामिल। कार्रवाई कौन करे? मिस्टर रेल यात्री हैरान। जवानों को देख सहम जाते। अरे भैया, सफर करना जोखिम का काम, लेकिन घर में कैद नहीं रह सकते। निकलना तो पड़ेगा ही। ऐसे में दुआ करिए सुरक्षित सफर की। लालू जी जादू-टोना करके निकल गए। जोखिम बरकरार। ममता दीदी आपै कुछ करो!

खान-पान
मिस्टर रेल यात्री ट्रेनों में मिलने वाले खाने से परेशान हैं। उनकी चिंता है आए दिन खराब खाने की शिकायतें। अक्सर खाने में कीड़े निकलना। महंगे आइटम के पैसे लेना। सस्ती क्वालिटी उपलब्ध करना। नकली मिलावटी सामान का इस्तेमाल। गंदगी का बोलबाला। शिकायत पर वेटर का गुर्राना। लेना हो तो लो वरना चलते बनो। तुम्हारे जैसे पचासों रोज मिलते हैं। मिस्टर रेल यात्री हैरान। कहते हैं-यह खाना खाकर घर पहुंचेंगे, कई बार मुश्किल लगता। जहरखुरानी का नाम सुन सहम जाते। मुंह पर मानो टेप लगा लेते। किसी का दिया सामान नहीं खाएंगे, चाहे कोई कुछ भी कहे।

अचंभे ही अचंभे
मिस्टर रेल यात्री सफर के लिए स्टेशन पहुंचे। टिकट काउंटर से लेकर प्लेटफार्म तक कई अचंभे दिखे। कहीं सांड़ आंखें दिखा रहा। कहीं गाय खाने के लिए हुड़ेस रही। बंदर बैग खींचने की ताक में। कुत्ता खाने के लिए मुंह ताक रहा। मौका मिला नहीं कि आपकी पूड़ियों वाला दोना झपट्टा मार ले गया। मिस्टर रेल यात्री दंग। स्टेशन पर तैनात इतने महारथियों से कैसे निपटें। खैर,आगे-पीछे निगाह चौकस कर बढ़े। पैर फिसला। धराशायी हो गए। गोबर में सन गए। ट्रेन लेट। प्लेटफार्म पर बैठ गए। मुस्टंड चूहे आकर बैग का हाल लेने लगे। परेशान मिस्टर रेल यात्री सोच में पड़ गए। काश? इतने अचंभों से निजात मिलती तो सफर का मजा कितना अच्छा होता? 

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