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कहानी से बड़ा हो गया एक चरित्र

येोूाू-Êाूाू क्या होता है। बचपन में तो जरूर एक न एक बार इससे सबका साबका पड़ा होगा। किसी नेोूाू का नाम लेकर डराया होगा, तो किसी ने छोटे से रंगते हुये तमाम बालों से लदे खटमल से थोड़े बड़े जन्तु कोोूाू बताया होगा। बाजार नेोूाू की शक्ल, अक्ल और रूप दोनों बदल दिया है। अब वह लोगों का मनोरांन कर रहे हैं। स्टिक की तरह टांगों वाले और अंडे के जसे सिर वालेोूाू को टीवी में वोडाफोन के विज्ञापनों में जरूर देखा होगा। अपनी नई-नई अदाओं के साथ। दिलचस्प बात यह है कि ये एनीमेटेड पात्र नहीं हैं। इनके कॉस्ट्यूम के पीछे असली औरतें हैं। देखने में ये दूसर ग्रह के प्राणी लगते हैं। कैमर और तकनीकी कमाल से देखने वे एनीमेटेड काटरून लगते हैं। सच यह है किोूाू के अवतार में अफ्रीकी महिलाएं हैं। ये सब की सब बैले डांसर हैं या फिर रंगमंच के कलाकार। इन दिनों इनकी दुनिया में धूम मची हुई है। टीवी तो टीवी सायबर वर्ल्ड में भी येोूाू धूम मचा रहे हैं। इनकी लोकप्रियता 44 साल पहले बने महान फिल्मकार सत्यजीत र के बौने किरदार ‘आंग’ से भी आगे निकल गई है। ‘आंग’ से प्रभावित हो कर हॉलीवुड के प्रसिद्ध निदेशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने 1में द एक्सट्रा टेरस्टियल बनाई। ‘आंग’ के आगे का ही विकास हैं जूजू। अपने हर अवतार में वह अलग-अलग और मजेदार हरकतों से लोगों का मनोरांन तो कर ही रहे हैं और संदेश भी पहुंचा रहे हैं।ोूाू को बनाना कोई आसान बात नहीं थी।ोूाू की चाल और हाव-भाव तय करना आसान बात नहीं थी। इसको तय करने में निर्माताओं को तीन हफ्ते लगे। तीस से ज्यादा लोगों की टीम ने कड़ी मशक्कत की। ाूाू को पहनाए जाने वाले कपड़ों को लेकर भी समस्या आई। कपड़े ऐसे तय किये गये, ताकि चलने-फिरने पर कपड़ों में सिलवटें पैदा न हों। कपड़ों को दो हिस्सों में बांटा गया। शरीर वाले हिस्से में फोम भरा गया, सिर में अलग कपड़ा पहनाया गया। सिर आम आदमी से बड़ा अंडे की तरह दिखे, इसलिये पर्सपेक्स नाम की एक चीज प्रयोग की गई।ोूाू के हाथ-पांव पतले दिखाने थे इसलिये सभी महिला कलाकारों को ही लिया गया।ोूाू को ओगिलीवी एंड माथर इंडिया की क्रिएटिव टीम ने बनाया है।ोूाू को कंपनी ने अब तक 13 विज्ञापनों में लिया है, जिसमें ये काफी पंसद किया गया। ाूाू ने फेसबुक में भी तूफान मचाया हुआ है, जिसमें इसके 65,000 दोस्त बन चुके हैं।ोूाू के नाम से गूगल में सर्च करने वर करीब साढ़े नौ लाख पेज खुलते हैं।ोूाू की परिकल्पना के बारे में वोडाफोन के डायरक्टर (मार्केटिंग और न्यू बिजनेस) हरित नागपाल का कहना है कि मीडिया रोाना तकरीबन 300 सेकेंड आईपीएल को देता है इसलिए हम ऐसी ही किसी फिगर की तलाश में थे जिससे दर्शकों के चेहर से मुस्कान गायब न हो। वोडाफोन के ये 13 विज्ञापन कंपनी की वैल्यू एडेड सर्विस को प्रोमोट करंगे। ओएंडएम इंडिया के क्रिएटिव डायरक्टर राजीव राव के अनुसारोूाू के फाइनल वर्जन के लिए उन्होंने कई तरह के प्रयोग किए तब कहीं एजेंसी ढाई महीने बाद 20-30 सेकेंड की फिल्म बना पाई। इसकी शूटिंग केपटाउन अफ्रीका में की गई। नागपाल के अनुसार इस विज्ञापन को बनाते समय काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 30 विज्ञापनों में कैरक्टर के एक जसे हाव-भाव दिखाने के लिए काफी खर्चा हुआ। इस विज्ञापन की पूरी शूटिंग के दौरान लगभग 30 करोड़ की लागत आई। पीनस्ट्रोम डिािटल एजेंसी के फांउडर महेश मूर्ति का कहना है कि आईपीएल के दौरान इस एड ने धमाल कर दिया। स्टोरी से ज्यादा ये कैरक्टर बिका है। अब कंपनीोूाू नाम के इस कैरक्टर को 30 और कॉमर्शियल में लेने की योजना बना रही है।

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