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उल्फा के शीर्ष नेताओं को जमानत से वार्ता की राह आसान

प्रतिबंधित संगठन उल्फा के उपाध्यक्ष और प्रचार सचिव को मंगलवार को टाडा की एक अदालत ने चार मामलों में जमानत दे दी जिसे सरकार और संगठन के बीच वार्ता के लिए अहम कदम माना जा रहा है।

टाडा न्यायाधीश सोनिका बोरा ने उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई को तीन मामलों में और प्रचार सचिव मिथिंग दैमारी को एक मामले में एक़-एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी।

टाडा अदालत ने 19 फरवरी को तीन अन्य मामलों में गोगोई को जमानत दी थी। जमानत याचिका को स्वीकारते हुए न्यायाधीश ने दोनों को निर्देश दिया कि बिना अदालत की इजाजत के असम छोड़कर नहीं जाएं और अपने पासपोर्ट तथा अन्य संबंधित दस्तावेज अदालत में जमा करें।

उन्हें टाडा अदालत को सूचित किये बिना गुवाहाटी नहीं छोड़ने का भी निर्देश दिया गया। और यदि वे अपने गहनगरों में रहना चाहते हैं तो उन्हें नियमित तौर पर पुलिस में हाजिरी लगानी होगी। गोगोई का गृहनगर शिवसागर है और दैमारी का क्षेत्र नलबाड़ी है।

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  • Web Title:उल्फा नेताओं को जमानत, वार्ता को बल मिलने की संभावना