DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आपसी समझौते से हत्या से माफी नहीं : कोर्ट

पहले हत्या कर दो फिर खून के रिश्ते ही दुहाई देकर पीड़ित परिवार से समझौता कर लो। कानून इसकी क्षाजत नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने दोहरी हत्या के मामले में चाचा-ताऊ के परिवारों के बीच में हुए शांति समझौते को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह ठीक है कि उनके बीच सुलह हो गई है और पीड़ितों ने उन्हें बख्श दिया है, लेकिन कानून उन्हें माफ नहीं कर सकता सकता,आखिर दो लोगों की जान गई है उसकी सजा उन्हें जरूर भुगतनी होगी। जहां तक आपस में हुए समझौते की बात है तो इसका इस्तेमाल वे भविष्य में शांति से रहने के लिए कर सकते हैं। जस्टिस एसबी सिन्हा और एमके शर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला मेरठ के एक मामले में दिया। कोर्ट ने कहा कि कानून का शासन स्थापित करना राज्य का प्रथम कर्तव्य है। कुछ हल्के अपराधों को छोड़कर (सात साल तक की सजा वाले अपराध)कोर्ट समझौते के आधार पर अपराधों में सजा माफ नहीं कर सकता। कोर्ट ने सतबीर आदि हत्यारों का यह तर्क खारिा कर दिया कि इस केस में कोई भी स्वतंत्र गवाह नहीं था और सभी गवाह पक्षपाती थे क्योंकि वे सब पीड़ित प्रतिद्वंद्वी परिवार से संबंधित थे। खंडपीठ ने कहा कि दोनों परिवारों के बीच पुरानी खूनी दुश्मनी है यह पूर गांव को पता है। पूर्व में भी दोनों परिवारों के बीच मारकाट होती रही है। ऐसे में गांव का कोई एक व्यक्ित किसी एक परिवार के खिलाफ गवाही देने कैसे आ सकता है? जाहिर है ऐसी स्थिति में केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर ही आधारित होगा। इन साक्ष्यों में दोहरी हत्या की पुष्टि हुई है और अभियुक्तों पर केस सिद्ध हुआ है। इस मामले में बदन सिंह के परिवार के दो समूहों के बीच में पुरानी रािंश थी जिसके चलते खेत में काम करते समय एक समूह के लोगों ने दूृसर समूह के दो लोगों की हत्या कर दी और एक को घायल कर दिया। इस मामले में चार लोगों को मेरठ की सेशन कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आपसी समझौते से हत्या से माफी नहीं : कोर्ट